Mon. Feb 18th, 2019

अचूक था भारत का मापन शास्त्र : जयन्त सहस्रबुद्धे

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रज्जू भैया स्मृति व्याख्यान माला में विद्वानों ने व्यक्त किए विचार

सांध्य ज्योति संवाददाता
जयपुर, 11 फरवरी। देश में ज्ञान की परम्परा और विशेषता से हम दूर चले गए हैं और आश्चर्यजनक प्रभाव से अपने देश से ज्यादा पश्चिम को श्रेष्ठ मानने लगे हैं। ये विचार विज्ञान भारती के राष्ट्रीय संगठन मंत्री जयंत सहस्रबुद्धे ने पाथेय कण सभागार में शनिवार शाम रज्जू भैया स्मृति व्याख्यानामाला के प्रथम पुष्प में व्यक्त किए। उन्होंने बताया कि अपने देश में विज्ञान क्या था, हमको विशेष अध्ययन की आवश्यकता है। विज्ञान में तंत्र ज्ञान, यंत्र ज्ञान के साथ-साथ विज्ञान के आधुनिक क्षेत्र में विकास पर अध्ययन की आवश्यकता है। उन्होंने दिल्ली के कुतुबमीनार के पास लौह स्तम्भ का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत के विज्ञान के अभाव में उसका निर्माण सम्भव नही था। उन्होंने बताया कि लौह स्तम्भ के बारे में डॉ. बाल सुब्रमण्यम ने रसायन विज्ञान का अध्ययन किया। उसके साथ ही उसका मापन विज्ञान का अध्ययन किया जिसे वर्तमान में मेट्रोलोजी विज्ञान कहते हैं। हमारे यहां एक हाथ,चार उंगल का मापन था। इस प्रकार से मापन किया जाता था जिसके प्रमाण को नकार दिया गया। भारत में मापन शास्त्र अचूक है जिसका कोटिल्य अर्थशास्त्र में वर्णन किया गया है। उन्होंने कहा कि विश्व धर्म सभा में भी स्वामी विवेकानन्द ने शिकागो में 11 सितम्बर 1892 की सभा में विज्ञान में भौतिक विज्ञान के साथ-साथ अध्यात्म विज्ञान के बारे में भी विश्व के सामने अपने विचार रखे। उन्होंने बताया कि भगवान नटराज की मूर्ति चक्रीय ब्रह्माण्ड के बारे में बताती है।

भारत में धर्म एवं विज्ञान का टकराव नहीं: विशिष्ट अतिथि इसरो के वैज्ञानिक डॉ.जगदीश चन्द्र व्यास ने बताया कि भारत में विज्ञान विषय में धर्म एवं विज्ञान का टकराव नहीं है जबकि पश्चिम में कहा जाता है कि धर्म और विज्ञान का कभी साथ नहीं हो सकता। अध्यात्म एवं विज्ञान भारत की संस्कृति में आरम्भ से ही रहा है। अद्वैत रामायण में विज्ञान को परिभाषित किया गया है। हम स्वयं भी अपनी आंखों के सामने प्रमाणित होते हुए देख सकते हैं। कार्यक्रम के आरम्भ में पाथेय कण के सम्पादक कन्हैयालाल चतुर्वेदी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के चतुर्थ संघचालक रज्जू भैया के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि उनका जीवन प्रेरणादायी था। आपातकाल के समय रूप बदलते हुए उन्होंने भूमिगत रहकर आन्दोलन का संचालन किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे योगी रमणनाथ ने कहा कि भौतिकी के साथ अध्यात्म का संगम होने पर परिणाम ज्यादा सकारात्मक होंगे।

विद्यार्थियों को पारितोषिक: कार्यक्रम से पूर्व दोपहर में प्राचीन भारत का विज्ञान विषय पर पोस्टर प्रदर्शनी रखी गई, जिसमें विज्ञान विषय के विद्यार्थियों ने भाग लिया सर्वश्रेष्ठ पोस्टर बनाने वाले विद्यार्थियों को पारितोषिक दिया गया। कार्यक्रम में प्रो. राजेन्द्र सिंह (रज्जू भैया) की भतीजी साधना सिंह, जयपुर सांसद एवं गणमान्य नागरिक भी उपस्थित रहे। इस मौके पर प्राचीन भारत का विज्ञान विशेषांक एवं काव्य भौतिकी पुस्तक का अतिथियों ने लोकार्पण किया।