September 23, 2020

अब घर बैठकर ही पेपर दे सकेंगे स्टूडेंट्स

कोरोना काल के चलते बदलाव

चंडीगढ़ की पंजाब यूनिवर्सिटी के फाइनल या एग्जिट सेमेस्टर के एग्जाम अब 17 सितंबर से शुरू होंगे। एग्जाम लेने का तरीका ऑनलाइन रहेगा। स्टूडेंट्स को पेपर लिखकर देना है, लेकिन फिजिकल इंटरेक्शन न होने के कारण इसे पूरी तरह ऑनलाइन माना जा रहा है। यह फैसला पीयू वीसी प्रो. राजकुमार की सिंडिकेट द्वारा बनाई गई स्पेशल कमेटी के साथ हुई मीटिंग में किया गया। अभी इसकी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई। मीटिंग के मिनिट्स आने के बाद इसकी घोषणा की जाएगी। यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (यूजीसी) ने सभी यूनिवर्सिटी को फाइनल एग्जिट सेमेस्टर के पेेपर सितंबर में ही कराने का आदेश दिया है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद पंजाब सरकार ने भी पेपर कराने की सहमति दे दी थी। मेडिकल यूनिवर्सिटी पेपर ले चुकी है। यूजीसी ने पेपर के दौरान अपनी सुविधा अनुसार हर यूनिवर्सिटी और इंस्टीट्यूट को अपने स्तर पर ऑनलाइन, ऑफलाइन या मिले-जुले तरीके से पेपर लेने की इजाजत दी थी। पीयू वीसी खुद इस कमेटी में थे। प्रो. नवदीप गोयल की अध्यक्षता में सिंडिकेट ने एक कमेटी बनाई थी, जिसके पास एग्जाम पर निर्णय करने के लिए प्रस्ताव भेजा गया था। कमेटी ने कह दिया था कि यदि वीसी की मौजूदगी में मीटिंग होगी तो निर्णय लेना संभव होगा। बेहतर है कि इस मुद्दे पर सिंडिकेट बुलाई जाए, क्योंकि कमेटी के फैसले बाद में अप्रूव नहीं हो रहे। पेपर के मसले पर तुरंत निर्णय लेना जरूरी था। कंट्रोलर ऑफ एग्जामिनेशन समेत सभी आला अधिकारी इस मीटिंग में शामिल हुए।

इस बार के लिए इस तरह होंगे एग्जाम
एग्जामिनेशन फॉर्म पहले से भरे हुए हैं और रोल नंबर स्टूडेंट्स को ऑनलाइन मिलेंगे। कॉलेज स्टूडेंट के प्युपिन नंबर चलेंगे। एग्जाम से आधा घंटा पहले सभी कॉलेजों, नोडल सेंटर और सुविधा सेंटर्स पर पेपर पहुंच जाएगा। साथ ही पेपर को आधा घंटा पहले पीयू की वेबसाइट पर अपलोड कर दिया जाएगा, ताकि स्टूडेंट्स को डाउनलोड कर सकें। इसके अलावा रेगुलर स्टूडेंट की ई-मेल पर 10 मिनट पहले पेपर भेजा जाएगा। स्टूडेंट्स अपने घर पर बैठकर पेपर दे सकते हैं। उन्हें 10 से 12 शीट में पेपर खत्म करना होगा। पेपर पूरा करने के लिए स्टूडेंट को 2 घंटे दिए जाएंगे। पहले की तरह सभी सवालों पर अनिवार्य की शर्त नहीं रहेगी, बल्कि 50 फीसदी सवाल ही करने होंगे। स्टूडेंट को पहले पेज पर अपना नाम, रोल नंबर व सभी जानकारियां देनी होंगी। हर शीट पर अपने साइन करने होंगे। पेपर का समय खत्म होने के बाद 2 घंटे के अंदर अंदर स्टूडेंट्स को पेपर वापस जमा कराना होगा। आंसर शीट को स्कैन करके और पीडीएफ में कनवर्ट करके स्टूडेंट ईमेल कर सकते हैं। वे सुविधा केंद्र या नोडल सेंटर पर इसे जमा भी करा सकते हैं। इसके अलवा अपने कॉलेज जाकर आंसर शीट जमा करा सकते हैं। प्राइवेट स्टूडेंट और ओपन लर्निंग वाले स्टूडेंट को हर शहर में सुविधा केंद्र और नोडल सेंटर से सभी तरह की मदद मिलेगी। इसी 2 घंटे के समय में स्टूडेंट स्पीड पोस्ट या रजिस्टर्ड पोस्ट के जरिए भी पेपर भेज सकता है। वे अपने कॉलेज या डिपार्टमेंट को इसकी रसीद भेज देगा।

पहले विद्यार्थियों को बिना ब्रेक के तीन घंटे दिए जाते थे
एग्जामिनेशन फॉर्म भरने के बाद रोल नंबर जारी होते थे। कॉलेज स्टूडेंट्स जबकि प्राइवेट और डिस्टेंस एजुकेशन वाले स्टूडेंट्स को यूनिवर्सिटी की ओर से रोल नंबर दिया जाता था, रोल नंबर के साथ ही सेंटर बना दिए जाते थे, जिसकी स्टूडेंट्स की पूरी जानकारी रहती थी। सेंटर पर सुपरिंटेंडेंट और सुपरवाइजर की जिम्मेदारी रहती थी कि स्टूडेंट्स का रोल नंबर और लिस्ट में उसका नाम चेक करके उसे बैठने की व्यवस्था के अनुसार बैठाएं। पेपर से 10 मिनट पहले आंसरशीट बांटी जाती थी। इस पर स्टूडेंट का नाम, रोल नंबर, एग्जाम कोड, सब्जेक्ट कोड, सेंटर का नंबर आदि भरना होता था। इसी पर सुपरवाइजर और स्टूडेंट के साइन होते थे। पेपर के पूरे समय पर प्रश्न पत्र वाला सील लिफाफा स्टूडेंट के सामने ही खोला जाता था और वहीं पर बांट दिया जाता था। स्टूडेंट को पेपर करने के लिए बिना ब्रेक के 3 घंटे दिए जाते थे। ज्यादातर सब्जेक्ट में सभी प्रश्न जरूरी होते थे। पेपर के दौरान तारीख और सब्जेक्ट वाली मोहर सभी आंसर शीट पर कई जगह लगाई जाती थी। पेपर के बाद आंसर शीट इकट्ठे करके सुपरवाइजर के पास इकट्ठी होती थी। यहां से एक लिफाफे में सील करके इन्हें वापस यूनिवर्सिटी भेज दिया जाता।