November 24, 2020

अब दुश्मन का पता आसानी से लगेगा

भारत अमेरिका के बीच बेका समझौते पर हस्ताक्षर

नई दिल्ली, 28 अक्टूबर (एजेंसी)। भारत और अमेरिका के बीच 2-2 मंत्री स्तरीय बैठक में बेसिक एक्सचेंज एंड कोऑपरेशन एग्रीमेंट (बेका) पर हस्ताक्षर किए गए। ् इसके बाद अब अमेरिका भारत के साथ जियो स्पेशल इंटेलिजेंस साझा कर पाएगा और भारत को जटिल मिसाइल तकनीक तक पहुंचने की अनुमति मिलेगी। अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो और रडंता म्ेचमतद्ध सोमवार को भारत पहुंचे थे। दोनों ने मंगलवार को भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से चर्चा की थी।

क्या है बेका जो इतने समय से चर्चा में बना हुआ था
बेका समझौता भारत को सैन्य एप्लीकेशंस से संबंधित की जानकारी देगा। इसके तहत दोनों देश मैप,नॉटिकल और एरोनॉटिकल चार्ट कमर्शियल और दूसरी अनक्लासिफाइड तस्वीरें जैसे डाटा एक दूसरे के साथ साझा कर सकते हैं। इस समझौते के बाद भारत हिंद महासागर में चीन के जंगी जहाजों पर और बारीकी से निगरानी रख पाएगा और अमेरिका अपने आर्मी सैटेलाइट के जरिए संवेदनशील भौगोलिक क्षेत्रों से जुड़ी जानकारी भारत के साथ शेयर कर पाएगा।

टारगेट का पता आसानी से लगा पाएगा
अगर फिर से कभी बालाकोट की तरह सर्जिकल स्ट्राइक होती है तो भारत को अपने टारगेट का पता करने में मदद मिलेगी। अब भारत इसके लिए अमेरिका के सैटेलाइट और दूसरे डेटा का इस्तेमाल कर सकेगा। हालांकिए यूपीए सरकार इस पर समझौते को लेकर गोपनीयता के मामले में अपनी चिंता जाहिर कर चुकी है।

भारत-चीन सीमा विवाद पर भी हुई बात
भारतीय अधिकारियों ने कहा कि इस चर्चा के दौरान दोनों पक्षों ने 175 दिनों से चल रहे चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के साथ भारतीय सेना के टकराव को लेकर भी चर्चा की। उन्होंने बताया कि तीनों अधिकारियों ने दोनों देशों के बीच संबंधों को और गहरा करने के लिए गहन चर्चा की ताकि वैश्विक स्तर पर सुरक्षित, स्थिर माहौल तैयार हो सके। बैठक में भारत की तरफ़ से विदेश मंत्री एस. जयशंकर और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह जबकि अमेरिका की तरफ से विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो और रक्षा मंत्री मार्क एस्पर इस बैठक में शामिल थे। इसके अलावा शीर्ष सैन्य और सुरक्षा अधिकारियों की मौजूदगी भी बैठक में रही। बैठक के बाद अमेरिकी रक्षा मंत्री माइक एस्पर ने कहा, दोनों देशों के बीच रक्षा समझौते हमारे साझा मूल्यों और हितों पर आधारित हैं। सब के लिए खुला और स्वतंत्र इंडो.पैसिफ़िक क्षेत्र हो इसके लिए हम कंधे से कंधा मिलाकर साथ खड़े हैं। खासकर चीन की आक्रामकता और गतिविधियों के मद्देनजर।

चीन-पाक परेशान
इस समझौते पर चीन के बाद पाकिस्तान ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने बयान में भारत के मिसाइल और सैन्य परीक्षणों पर सवाल खड़े किए हैं व कहा है कि भारत को आधुनिक सैन्य साज-सामान, तकनीकमुहैया कराने के कारण दक्षिण एशिया में रणनीतिक स्थिरता के खतरे को पाकिस्तान लगातार आगाह करता रहा है। भारत का युद्धक सामग्री इक_ा करना, परमाणु ताकतों को बढ़ाना, हथियार प्रणालियों को विकसित करने जैसी चीजें दक्षिण एशिया की शांति के लिए गंभीर नतीजे लेकर आ सकती हैं।