November 29, 2020

अब मेयर कुर्सी के लिए दौड़

महापौर-उपमहापौर के लिए मशक्कत, वरिष्ठ नेता सक्रिय

सांध्य ज्योति संवाददाता
जयपुर, 5 नवम्बर। प्रदेश की सभी 6 नवगठित नगर निगम के नतीजों के बाद अब महापौर और उपमहापौर की कुर्सी के लिए दौड़ शुरू हो गई है। राजनीतिक पार्टियां अपने-अपने खेमे मजबूत कर रही हैं और इसके लिए उन्होंने सभी पार्षदों की बाड़ेबंदी भी कर दी है। बीजेपी ने सभी जगह वरिष्ठ नेताओं को सक्रिय कर दिया है तो कांग्रेस में भी ऐसी ही हलचल दिख रही है। जहां स्पष्ट बहुमत है वहां तो पार्टियों को ज्यादा परेशानी नहीं हो रही लेकिन अब पार्टियों की सारी उम्मीद आपने बागी और निर्दलीय पार्षदों पर ही टिकती दिख रही है। नगर निगम के चुनाव जब शुरू हुए तब ऐसा माना जा रहा था कि कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही पार्टियां तीन-तीन निगम आपस में बांट लेंगे लेकिन नतीजों के बाद कहानी कुछ और ही निकल कर उभरी है। जहां दो में कांग्रेस और दो में बीजेपी को स्पष्ट बहुमत मिला है वहीं दो नगर निगम त्रिशंकु स्थिति में दिख रहे हैं।

पार्षदों को बाड़े में रखा
महापौर की कुर्सी पर मुकाबले को रोचक बनाने के लिए बीजेपी और कांग्रेस ने अपने अपने पार्षदों को बाड़े में रख रखा है। जयपुर ग्रेटर और जोधपुर दक्षिण में बीजेपी को स्पष्ट बहुमत है जबकि कोटा उत्तर और जोधपुर उत्तर में कांग्रेस का स्पष्ट बहुमत है लेकिन सभी जगह तस्वीर साफ हो ऐसी बात भी नहीं है। जयपुर हेरिटेज के साथ ही कोटा दक्षिण में भी मुकाबला रोचक बना हुआ है। जयपुर ग्रेटर में तो बीजेपी को स्पष्ट बहुमत मिल गया है लेकिन हेरिटेज का मुकाबला काफी रोचक है जहां बीजेपी को 42 कांग्रेस को 47 और निर्दलीय को 11 वार्ड में जीत मिली है। यहां पांच निर्दलीयों को अपने साथ जोड़ कर कांग्रेस महापौर बनाने का दावा कर रही है जबकि बीजेपी का कहना है कि कांग्रेस निर्दलीयों के नाम पर केवल माहौल बना रही है।

कौन किसके संपर्क में
दूसरी तरफ बीजेपी भी कुछ ऐसे ही दावे कर रही है। जयपुर हेरिटेज के लिए बीजेपी के चुनाव प्रभारी वासुदेव देवनानी और चुनाव समन्वयक अर्जुनराम मेघवाल का दावा है कि कई निर्दलीय पार्षद लगातार बीजेपी के संपर्क में भी हैं। देवनानी ने तो यहां तक कह दिया कि कांग्रेस हेरिटेज के अपने 47 पार्षदों को एकजुट रख ले वही बहुत है। इशारों-इशारों में उन्होंने कहा कि कहीं कांग्रेस के कैंप में ही सेंध ना लग जाए। बीजेपी के एकमात्र अल्पसंख्यक पार्षद रईस कुरैशी का बयान भी हेरिटेज में कांग्रेस की चिंताएं बढ़ाने वाला हो सकता है। कुरैशी कहते हैं कि बीजेपी भी अल्पसंख्यकों को साथ लेकर चल रही है और 10 नवंबर को महापौर के चुनाव के बाद इसका और खुलासा हो जाएगा कि कितने अल्पसंख्यक बीजेपी के साथ आते हैं। इसी तरह कोटा दक्षिण के बीजेपी के गढ़ में भी कांग्रेस ने बड़ी सेंध लगाई है।

निर्दलीयों की भूमिका खासी
त्रिशंकु निगमों में निर्दलीयों की भूमिका खासी महत्वपूर्ण रहेगी और ऐसी सूरत में पार्टियों की नजरें बागी प्रत्याशियों पर टिक गई हैं। सारी मशक्कत इस बात पर हो रही है कि कौनसा बागी किस की बगिया उजड़ का है और किसकी संवारता है।