Fri. Mar 22nd, 2019

अब 90 करोड़ मतदाताओं की बारी

ये तय करेंगे राजनीतिक दलों का भविष्य!

नई दिल्ली, 11 मार्च (एजेंसी)। चुनाव आयोग ने 2019 के लोकसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया है। इस चुनाव में करीब 90 करोड़ मतदाता अपने मत का प्रयोग करके नई सरकार चुनेंगे यानी 17वीं लोकसभा का स्वरूप तय करेंग। राजनीतिक दलों का हिसाब-किताब लेंगे। माना जा रहा है कि आने यह आंकड़ा और बढ़ सकता है क्योंकि वोटर कार्ड बनवाने का काम अभी जारी है। यह चुनाव अपने आप में खास होगा, क्योंकि यह इस सदी का पहला आम चुनाव होगा जिसमें इसी सदी में पैदा हुए युवा मतदान कर सकेंगे। 2019 के ऐसे मतदाता वोट देने के पात्र होंगे जिनका जन्म एक जनवरी 2000 या उसके बाद हुआ है। 2014 के लोकसभा चुनाव में 834,101,497 रजिस्टर्ड वोटर थे, जिनमें से 553,801,801 यानी करीब 66.4 परसेंट ने अपने मत का इस्तेमाल किया था। चुनाव आयोग के सूत्रों ने बताया कि 1 जनवरी 2019 तक के आंकड़े 22 फरवरी को जारी हुए थे, जिसके मुताबिक 89.7 करोड़ मतदाता हैं। इनमें से 46.5 करोड़ पुरुष और 43.2 करोड़ महिलाएं हैं। 33,109 मतदाताओं ने खुद को थर्ड जेंडर में शामिल किया है। इसी प्रकार करीब 16.6 लाख सर्विस वोटर हैं। 2014 में यह सिर्फ 13.6 लाख थे। सर्विस वोटर ऐसे मतदाता होते हैं जो सरकारी अधिकारी, सैन्य बल, सशस्त्र पुलिस बल या विदेशों में नौकरी करते हैं। वो अपना मतदान प्रॉक्सी या पोस्टल बैलेट के जरिए कर सकते हैं। आठ करोड़ से अधिक युवा पहली बार मतदान करेंगे। इन पर सभी राजनीतिक दलों की नजर है।

10,35,932 पोलिंग स्टेशन होंगे : चुनाव आयोग के मुताबिक 2019 में देश भर में 10,35,932 पोलिंग स्टेशन बनाए जाएंगे। 2014 के लोकसभा चुनाव में 9,28,237 स्टेशन बनाए गए थे। इसी तरह 2009 के चुनाव में 8,30,866 पोलिंग स्टेशन थे। 2014 में 1339402 बैलेट यूनिट और 1029513 कंट्रोल यूनिट का इस्तेमाल किया गया था।

60 हजार करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान : कारनीज एंडोमेंट फोर इंटरनेशनल पीस थिंकटैंक में सीनियर फेलो और दक्षिण एशिया कार्यक्रम के निदेशक मिलन वैष्णव के मुताबिक 2016 के अमेरिकी राष्ट्रपति और कांग्रेस चुनावों में 46,211 करोड़ रुपये (650 करोड़ डॉलर) खर्च हुए थे।
वैष्णव के मुताबिक भारत में 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में 35,547 करोड़ रुपये (500 करोड़ डॉलर) खर्च हुए थे । 2019 के चुनाव में अमेरिकी चुनावों में खर्च का आंकड़ा आसानी से पार हो सकता है। ऐसा हुआ तो यह दुनिया का सबसे खचीर्ला चुनाव साबित होगा। सीएमएस के एन भास्कर राव के मुताबिक खर्च की दर अगर यही रही तो 2019 के लोकसभा चुनाव में 50,000 से 60,000 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। पिछले लोकसभा चुनाव में 35,000 करोड़ रुपया खर्च हुआ था।

पांच बड़े मुद्दे

राष्ट्रवाद: पुलवामा हमले के बाद भाजपा ने राष्ट्रवाद को मुख्य मुद्दा बनाया है।

पाकिस्तान: वायुसेना ने पुलवामा हमले के बाद पाक में आतंकी शिविर पर हमला किया। इस हमले के सबूतों को लेकर भाजपा और विपक्ष आमने-सामने हैं।

राफेल: कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी लगातार यह आरोप लगा रहे हैं कि राफेल डील में मोदी सरकार ने भ्रष्टाचार किया है। वहीं, सरकार राफेल को देश की जरूरत बता रही है।

किसान : केंद्र सरकार ने अंतरिम बजट में छोटे किसानों के खाते में हर साल 6000 रुपए ट्रांसफर करने का ऐलान किया था। मोदी अपनी रैलियों में इसे क्रांतिकारी कदम बता रहे हैं। वहीं, कांग्रेस मप्र, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में किसानों की कर्ज माफी का मॉडल देशभर में लागू करने का वादा कर रही है।

राम मंदिर : भाजपा का आरोप है कि कांग्रेस के अड़ंगों की वजह से अयोध्या विवाद पर जल्द फैसला नहीं आ पा रहा। वहीं, कांग्रेस का कहना है कि भाजपा सिर्फ चुनाव के समय यह मुद्दा उठाती है।