Fri. Nov 15th, 2019

अयोध्या को लेकर फैसला अब किसी भी वक्त

पुलिस सक्रिय, सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई

लखनऊ, 8 नवम्बर(एजेंसी)। अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के आने वाले फैसले को लेकर पुलिस प्रशासन पूरी तरह से सक्रिय है। अयोध्या और आस-पास के जिलों में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। अयोध्या के पड़ोसी जिले अंबेडकरनगर के विभिन्न कॉलेजों में 8 अस्थायी जेल बनाई गई हैं। अंबेडकरनगर जिला अयोध्या और फैजाबाद से सटा हुआ है। लिहाजा, अगर फैसले के बाद कोई अप्रिय स्थिति बनती है तो उपद्रवी तत्वों को इन जेलों में रखा जाएगा। अकबरपुर थानाक्षेत्र में तीन अस्थायी जेल, टांडा, जलालपुर, जैतपुर, भीटी और आलापुर थानाक्षेत्र में एक-एक अस्थायी जेल बनाई गई है। प्रदेश के सभी जिलों में अलर्ट जारी कर दिया गया है। इतना ही नहीं, अयोध्या को छावनी में तब्दील कर दिया गया है। चप्पे-चप्पे पर पुलिस फोर्स तैनात है। इसके साथ ही जिला प्रसाशन लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की बात भी कह रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपने नेताओं और मंत्रियों से अयोध्या विवाद पर बयानबाजी न करने की सलाह दी है। एसएसपी ने बताया कि 10 हजार से ज्यादा व्हाट्सएप ग्रुपों पर नजर रखी जा रही है। इसमें जो लोग शामिल हैं, उनमें से कुछ के नंबर सर्विलांस पर लिए गए हैं। अयोध्या आने वाले सभी रास्तों पर पुलिस तलाशी अभियान चला रही है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने यूपी में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अर्धसैनिक बलों की 15 कंपनियों को भेजने की मंजूरी दी है। केंद्रीय बल के करीब 4000 जवान 18 नवंबर तक यहां तैनात रहेंगे।

सीजेआई रंजन गोगोई ने जस्टिस बोबडे को सौंपी तत्काल सुनवाई के मामलों की लिस्टिंग
उधर अयोध्या, सबरीमाला और आरटीआई समेत कई अहम मामलों की सुनवाई कर रहे चीफ जस्टिस रंजन गोगोई 17 नवंबर को रिटायर होने वाले हैं। इससे पहले उन्होंने नए चीफ जस्टिस नियुक्त हुए एस.ए.बोबडे को अहम मामलों की लिस्टिंग का काम दे दिया है। सीजेआई रंजन गोगोई के रिटायरमेंट में अब महज 5 कार्यदिवस ही बचे हैं। सीजेआई रंजन गोगोई ने अपने उत्तराधिकारी बोबडे को ऐसे सभी अहम मामलों की लिस्टिंग सौंपी है जिनकी तत्काल सुनवाई की जानी है। ऐसे में स्पष्ट है कि अयोध्या जैसे संवेदनशील मामले पर जल्दी ही फैसला आ सकता है। बता दें कि मामले की सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने 16 अक्टूबर को फैसला सुरक्षित रख लिया था। सीजेआई रंजन गोगोई ने कहा था कि फैसला लिखने के लिए कम से कम एक महीने की जरूरत है। वह 17 नवंबर को रिटायर होने वाले हैं। ऐसे में उससे पहले किसी भी दिन अयोध्या समेत अहम मामलों पर फैसला आ सकता है। अयोध्या, आरटीआई, सबरीमाला और राफेल डील जैसे कई अहम मामले हैं जिन पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला देश में राजनीतिक और सामाजिक परिदृश्य के लिहाज से काफी अहम होगा।