September 26, 2020

अयोध्या में बनेगी मॉर्डन मस्जिद

गुंबद, मेहराब, मीनारें कुछ नहीं होगा

अयोध्या, 12 सितम्बर (एजेंसी)। अयोध्या के धन्नीपुर गांव में बनने जा रही मस्जिद का डिजाइन जामिया मिलिया इस्लामिया के आर्किटेक्चर डिपार्टमेंट के डीन प्रफेसर एसएम अख्तर तैयार करेंगे। प्रो.अख्तर का कहना है कि इसमें पारंपरिक मस्जिद की झलक नहीं दिखेगी। यह मॉडर्न होगी। प्रो. एसएम अख्तर ने कहा, मस्जिद की डिजाइन कंटेपरेरी होगी। मैं बीते हुए कल में नहीं जीता हूं और किसी चीज की नकल एक तरह की विकृति है। 64 साल के एसएम अख्तर मस्जिद के कॉन्सेप्ट पर काम कर रहे हैं। सुन्नी वक्फ बोर्ड को मिली 5 एकड़ जमीन पर मस्जिद के साथ अस्पताल और एक कल्चरल रिसर्च सेंटर भी बनेगा। प्रो.अख्तर बताते हैं, जिस परंपरा को हम कायम रखेंगे वह है- खिदमत-ए- खल्क यानी समाज की सेवा। अख्तर ने तय किया है कि वह अपने डिजाइन में किन चीजों को शामिल नहीं करेंगे। प्रो. अख्तर कहते हैं, माना जाता है मेहराब इस्लामिक है। जबकि ऐसा नहीं है। यह कला मुगल, भारतीय या ईरानी हो सकती है लेकिन इस्लामिक नहीं।

मेरा मकसद भ्रम को खत्म करना
प्रो.अख्तर ने बताया, काबा इस्लाम की नींव है लेकिन न इसमें मेहराब है न गुंबद और न मीनारें। फिर ये इस्लाम को कैसे रिप्रजेंट कर सकती हैं। मैं कई सालों से इस पर रिसर्च कर रहा हूं। यह कहना कि इस्लामिक आर्किटेक्चर मध्यकाल से जुड़ा है, एक साजिश लगती है।
मेरा मकसद इस तरह भ्रम को खत्म करना है। यह पूछने पर कि क्या ऐसी मस्जिद के विचार को लेकर अचडऩें आएंगी, प्रो. अख्तर ने कहा, आपको लोगों को बताना पड़ता है। आप आंखें बंद करके यह सब नहीं कर सकते हैं। मस्जिद में जो बेसिक चीज होती है वह है दिशा। अगर आप इसे बदलने की कोशिश करोगे तो कोई स्वीकार नहीं करेगा। आपको मूल सिद्धांतों को बनाए रखना होगा।

‘मेरा काम सिर्फ मस्जिद को डिजाइन करना’
प्रफेसर ने कतार के स्पेसशिप और कर्नाटक की एक जीरो एनर्जी मस्जिद का हवाला देते हुए कहा, ‘हर जगह चीजें तेजी से आगे बढ़ रही हैं। बस धारणाओं को बनाए रखना है।’ क्या यह प्रॉजेक्ट एक आर्किटेक्चरल एक्सपेरिमेंट होगा? क्या वे इसकी राजनीतिकरण से भयभीत होते हैं ? प्रफेसर कहते हैं, ‘मैं इस बारे में नहीं सोचता हूं। यह मेरा काम नहीं है। जब उन्होंने मुझे एक इमारत बनाने को कहा, तो मुझे यह काम मिला। इसके अलावा किसी चीज पर मेरा ध्यान नहीं है।’