October 27, 2020

असली तस्वीर निकाय चुनाव में साफ होगी

सरकार को नफा और नुकसान के 10 बड़े फैक्टरों का आंकलन

सांध्य ज्योति संवाददाता
जयपुर, 7 अक्टूबर। कोरोना काल में राजस्थान चुनावों के दौर से गुजर रहा ह। ग्राम पंचायतों के चुनाव चल रहे हैं। अब जिला परिषद् और पंचायत समितियों के चुनाव होने हैं। लगभग इनके साथ-साथ ही जयपुर, जोधपुर और कोटा के 6 नगर निगमों के साथ ही 129 अन्य स्थानीय निकायों के चुनाव भी प्रस्तावित हैं। चूंकि ग्राम पंचायत चुनाव पार्टी सिंबल पर नहीं होते हैं, लिहाजा इन चुनावों में कौन सी पार्टी का दबदबा रहा और कौन सी का नहीं इसका अंदाजा लगाना काफी मुश्किल होता है, क्योंकि दोनों पार्टियां अपने-अपने हिसाब से दावे करती हैं। लेकिन अन्य पंचायती राज के अन्य और स्थानीय निकाय चुनाव पार्टी सिंबल पर होते हैं इसलिये कांग्रेस और बीजेपी समेत अन्य पार्टियों का भी फोकस इन्हीं चुनावों पर ज्यादा रहता है। इन चुनावों के परिणाम एक तरह से सरकार के कामकाज पर पॉजिटिव और निगेटिव मुहर लगाने का काम करते हैं। निकट भविष्य में होने वाले इन चुनाव में कई फैक्टर जहां राज्य सरकार के पक्ष में हैं, वहीं कई इसके लिये नकारात्मक भी साबित हो सकते हैं।

ये फैक्टर हैं सरकार के पक्ष में
1. अब तक का ट्रेंड है कि आमतौर पर पंचायती चुनाव में सत्ताधारी पार्टी का ही दबदबा रहता आया है। लोग विकास की उम्मीद में सत्ताधारी पार्टी को ही वोट करते रहे हैं।
2. सरकार का अभी 3 साल से ज्यादा का कार्यकाल बचा है। विकास के काम मौजूदा सरकार द्वारा ही करवाए जाएंगे इसलिए कांग्रेस के पक्ष में समीकरण की संभावना है।
3. ग्रामीण इलाकों में कांग्रेस का परम्परागत वोट है। इसलिए पंचायत राज संस्थाओं के चुनाव में यह फैक्टर कांग्रेस के पक्ष में जाता है।
4. केंद्र सरकार और बीजेपी से नाराज किसान, दलित और अल्पसंख्यक तबकों का वोट कांग्रेस को मिलने की संभावना ज्यादा रहती है।
5. कांग्रेस उम्मीदवार खुद की सरकार होने का हवाला देकर बड़े वादे कर सकते हैं। जनता उन पर विश्वास भी कर सकती है क्योंकि ग्रामीण विकास की योजनाओं की मंजूरी और राशि रिलीज करने में सरकार की कड़ी से कड़ी जुडऩा जरूरी होता है।
ये फैक्टर सरकार की जीत में बन सकते हैं बाधक
1. कांग्रेस की गुटबाजी कम होने के बजाय बढ़ी है इसका नुकसान होने की संभावना है।
2. सचिन पायलट की बगावत और वापसी के बाद अब ग्रास रूट स्तर तक कांग्रेस में विभाजन हो गया है। इसका नुकसान पंचायती राज चुनावों में होगा।
3. टिकट वितरण के बाद बगावत
और उससे नुकसान होने की संभावना है।
4. बेरोजगार नियुक्तियां नहीं मिलने से नाराज हैं। नाराजगी सरकार पर भारी पड़ सकती है।

5. स्थानीय राजनीति और स्थानीय समस्याओं के कारण भी कांग्रेस को कई जगह नुकसान हो सकता है। पंचायत राज चुनाव में कांग्रेस का प्रदर्शन कमजोर रहने से सरकार के परशेप्शन पर सवाल उठेंगे और बीजेपी इसे मुद्दा बनाएगी।