September 24, 2020

आजादी के 70 साल बाद भी दर-दर की ठोकरें खा रहा घुमन्तु समाज

आवासीय भूमि के अभाव में जी रहे हैं संकटमय जीवन

कोटपूतली, 7 सितंबर। घुमन्तु समाज अपने गौरवमयी इतिहास के लिए जाना जाता हैं, लेकिन अब तक रही लगभग सभी सरकारों द्वारा इनकी ओर ध्यान नहीं दिए जाने से भूमि के अभाव में आजादी के 70 साल बाद भी घुमन्तु लोगों को ना चाहते हुए घुमक्कड़ जीवन जीने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। कुछ परिवारों ने स्थाई रूप से रहने की हिम्मत भी की तो भूमि के अभाव में तम्बुओं में रहकर अत्यधिक विपदा भरा जीवन जीना पड़ रहा है। इस समस्याओं के समाधान को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता नित्येन्द्र मानव ने 15 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, राज्य के समाज कल्याण मंत्री मास्टर भंवर लाल मेघवाल तथा राज्यमंत्री राजेन्द्र सिंह यादव सहित राज्य के मुख्य सचिव को प्रेषित कर कार्रवाई की मांग की है।

राष्ट्रपति कर चुका है राज्य सरकार से रिपोर्ट तलब
पिछले दिनों सामाजिक कार्यकर्ता नित्येन्द्र मानव ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर राजस्थान में रह रहे घुमन्तु समाज की समस्याओं से अवगत करवाया था। जिस पर कार्रवाई करते हुए राष्ट्रपति सचिवालय ने लगभग एक वर्ष पूर्व राज्य के मुख्य सचिव से रिपोर्ट तलब की थी। राष्ट्रपति द्वारा दिए आदेशों की पालना करते हुए मुख्य सचिव ने सभी जिला कलेक्टर्स को जिलों में रह रहे घुमन्तु समाज की आवास सम्बन्धी समस्याओं का समाधान किये जाने के निर्देश दिए थे। जिनकी पालना में आज तक भी कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।

सुप्रीम कोर्ट में दायर की जाएगी जनहित याचिका
मानव ने बताया कि पूरे देश में घुमन्तु जाति के लोगों की संख्या लगभग 15 करोड़ है, लेकिन अब तक कि सभी सरकारों द्वारा इनकी घोर उपेक्षा किए जाने तथा देश के नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा इनको समाज की मुख्यधारा से जोडऩे की दिशा में प्रभावी प्रयास नहीं किए जाने से घुमन्तु जाति के लोग आज भी गुमनामी और दर्द भरी जिंदगी जी रहे हैं, जो कि सरकारी सिस्टम की कार्य शैली पर सवाल उठ रहे है। मानव ने बताया कि सम्बंधित विभागों से आंकड़े जुटाकर देश के घुमन्तु समाज के लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाने को लेकर जल्द ही सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की जाएगी। उन्होंने बताया कि क्षेत्र के विभिन्न गांवों में पिछले कई वर्षों से घुमन्तु समाज के लगभग 104 परिवार अस्थाई रूप से तम्बुओं में रह रहे हैं।

विभिन्न गांवों में रहे रहे परिवार : विभिन्न गांवों समेत पूरे कोटपूतली उपखण्ड में लगभग 500 परिवार रह रहे हैं। इसी प्रकार शाहपुरा, विराटनगर, थानागाजी, बानसूर तथा बहरोड़ में भी हजारों परिवार अस्थाई रूप से निवास कर रहे हैं। राज्य सरकार द्वारा गाडिय़ा लुहारों सहित अन्य घुमन्तु जातियों को एक स्थान पर स्थाई रूप से बसाने एवं इनको समाज की मुख्यधारा से जोडऩे के लिए विभिन्न योजनाएं लागू की गई थी, लेकिन सम्बंधित विभागों की उदासीनता के चलते घुमन्तु परिवारों को योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। उल्लखनीय है कि सामाजिक कार्यकर्ता मानव के नेतृत्व में घुमन्तु समाज के सैकड़ों लोगों द्वारा 14 दिनों तक धरना दिया गया था। जिस पर तत्कालीन कलेक्टर ने एडीएम को घुमन्तु समाज के परिवारों को स्थाई रूप से बसाने के निर्देश दिए थे। जिस पर एडीएम कोटपुतली ने धरनार्थियों को लिखित में आश्वासन देते हुए सम्बन्धित विभागों के अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए थे। लिखित आश्वासन के छह माह बाद भी कार्रवाई नहीं होते देख मानव के नेतृत्व में एक प्रतिनिधि मंडल राज्यमंत्री यादव व कलेक्टर जगरूप सिंह यादव से मिलकर धरनार्थियों को लिखित में दिए गए आश्वासनानुसार कार्रवाई किए जाने की मांग की थी।

कार्रवाई के दिए थे निर्देश : मंत्री यादव ने अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। मंत्री यादव व जिला कलेक्टर द्वारा दिए गए आदेशानुसार एडीएम कोटपुतली की अध्यक्षता में अनेकों बार मीटिंग भी हुई, लेकिन आज तक भी घुमन्तु समाज की किसी भी समस्या का समाधान नहीं हो पाया है। मानव ने एक बार फिर से उच्च अधिकारियों को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की है।