September 25, 2020

आत्मचिंतन की बात करना विद्रोह है तो हां हमने किया

कांग्रेस नेता आनंद शर्मा बोले

दिनेश तिवाड़ी
नई दिल्ली, 4 सितम्बर। कांग्रेस में सुधार को लेकर आवाज उठी। बदले में आरोप प्रत्यारोप हुए। कुछ आश्वासन दिए गए और फिर बात आई गई हो गई। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखने वाले 23 वरिष्ठ नेताओं में शामिल आनंद शर्मा को अब तक यह पता नहीं कि सुधार की गाड़ी कब चलेगी। पत्र विवाद के बाद पहली बार किसी मीडिया से रूबरू होते हुए थोड़ी खीझ, थोड़ी लाचारगी और थोड़े गुस्से से भरे आनंद शर्मा ने एक मीडिया हाउस से बातचीत में बेबाकी से कहा, आज से पहले कांग्रेस कभी इतनी कमजोर नहीं थी। कार्यसमिति की बैठक में सवाल उठाने वाले नेताओं को साथ जो कुछ हुआ था वह अभियान था। युवा कांग्रेस में चुनाव शुरू कराने वाले राहुल के फैसले पर भी सवाल उठाते हैं और कहते ह, अब वहां परिवारवाद का सिलसिला शुरू हो गया है। संगठन में ऐसे लोग हम पर सवाल उठा रहे हैं जो कभी कांग्रेस को छोड़ गए थे।

कांग्रेस में बिखराव के हालात
शर्मा ने कहा, जिस तरह की बिखराव की स्थिति हमने हाल में कांग्रेस में देखी है, अनिश्चितता की उस पर हम सब चिंतित हैं। मुख्य कारण है कि देश में आज गहरा संकट है। राजनीति और प्रजातंत्र का जो नैरेटिव है, उस पर भाजपा और आरएसएस की सोच हावी है और उनका वर्चस्व है। अगर विपक्ष कमजोर होगा और उसका सीधा नुकसान हमारी संस्थाओं, लोगों के आत्मविश्वास पर है और भारत के आम नागरिक के मूल अधिकारों में है। यही हमारी चिंता का मुख्य कारण था। कांग्रेस आज से पहले कभी इतनी कमजोर नहीं थी। क्योंकि संगठन की अनदेखी की गई है और यह बात हमने कांग्रेस अध्यक्ष को भेजी गई चिठ्ठी में भी कही है। पिछले दो लोकसभा चुनाव में 2014 और 2019 में एक में लगभग साढ़े दस करोड़ नया वोटर तो दूसरे में आठ करोड़ नया वोटर आया। 2009 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को 11.92 करोड़ वोट मिला और भाजपा को 7.84 करोड़ वोट मिला। जब 2014 में साढ़े दस करोड़ नया वोटर आया तो इस चुनाव में हमारा वोट घट कर 10.69 करोड़ वोट हो गया। यानि करीब 1.23 करोड़ वोट हमारा कम हुआ जबकि जबकि भाजपा 7.84 करोड़ से बढ़कर 17.60 करोड़ पहुंच गई। पांच साल हम विपक्ष में रहे भाजपा सरकार ने नोटबंदी से लेकर त्रुटिपूर्ण जीएसटी समेत बड़ी गलतियां की जिसे कारोबार-रोजगार टूटे। देश में इसको लेकर हताशा और निराशा थी और लोगों ने कांग्रेस की ओर देखा कि क्या ये हमारे लिए विकल्प हैं।

2019 के चुनाव में आठ करोड़ नए वोटर जुड़े तो भाजपा का वोट बढ़कर 22.94 करोड़ पहुंच गया जबकि कांग्रेस को 11.94 लाख वोट ही मिला। यानि देश में साढे अठारह करोड़ नये वोटर जुडऩे के बाद भी भाजपा और कांग्रेस के बीच वोट का अंतर बहुत बड़ा हो गया। यह कहने में कोई गुरेज नहीं कि कांग्रेस इतनी कमजोर कभी नहीं थी। इस हालत में भी हम इनकार के मूड में रहें तो हम अपनी पार्टी के साथ न्याय नहीं कर रहे। कांग्रेस के प्रति हमारी प्रतिबद्धता है तो मेरे साथियों के साथ पूरी पार्टी के लिए गंभीर आत्मचिंतन जरूरी है।

कोई चिंतन नहीं हुआ
शर्मा ने कहा, 2019 चुनाव के बाद राहुल गांधी के इस्तीफे के 15 महीने हो गए। इस पर कोई भी आत्मचिंतन या विश्लेषण नहीं हुआ बल्कि इस शब्द को ऐसा बना दिया गया है जैसे कि यह अप्रजातांत्रिक शब्द है। यह पूछे जाने पर कि क्या पार्टी अध्यक्ष को पत्र लिखना बगावत है तो शर्मा ने कहा, अगर विद्रोह शब्द का मतलब बदल दें कि सच्ची तस्वीर पेश करना नि:संकोच राष्ट्र हित है। कांग्रेस के हित में अपनी बात कहना बगावत है तो मैं इसे स्वीकार करता हूं। भावनाओं की बात हो,माता या परिवार की बात,लोग कहते हैं कि किसी को कष्ट नहीं होना चाहिए। तो मैं आज आप से कहता हूं कि सबसे बड़ा कष्ट मेरी मां को हुआ जब हमको गद्दार और जयचंद कहा गया जिन्होंने खुद हमारे खून से सने कपड़े उतारे थे, जब मैं कांग्रेस के लिए लड़ाई में लाठी-डंडों से पीटा जाता था। बेहद भावुक होते हुए आंखों में छलक आए आंसू रोकते हुए वे बोले, हम तो इंदिरा गांधी, संजय गांधी, राजीव गांधी के काल से लेकर अब तक तीन पीढिय़ों से कांग्रेस के साथ हैं।

सुधार के संकेत नहीं…
कांग्रेस के भविष्य के बारे में पूछे जाने पर उन्होने कहा, हमने जो मुद्दे उठाए हैं, उनके समाधान का कोई संकेत अब तक नहीं है। कहा तो गया था कि एक कमेटी बनेगी। हम अपेक्षा करते हैं कि इस पर खुले मन से चर्चा होगी। सोनिया गांधी ने कार्यसमिति में जो अंतिम शब्द कहे थे, उसमें काफी परिपक्वता और संवेदनशीलता थी। हमने आज की चुनौती की गंभीरता को देखते हुए पत्र में इसका भी उल्लेख किया है। आज समय आ गया है कि कांग्रेस पहले अपने को संगठित कर विपक्ष का एक बड़ा मंच बनाए, जिसमें तमाम प्रगतिशील व प्रजातांत्रिक दल आ जाएं। इसमें उन लोगों को भी शामिल किया जाए जो बड़े-बड़े नेता हैं और कई राज्यों में तो मुख्यमंत्री हैं। यह जिम्मेवारी कांग्रेस की है और वह ऐसा करती है तो देश को एक विकल्प दिखेगा। आज जो लगता है कि मोदी का विकल्प नहीं है तो हम इस रास्ते यह विकल्प दे सकते हैं। हम और हमारे साथी कांग्रेस संगठन के साथ मिलकर काम करना चाहते हैं और हम इस पद के न इच्छुक हैं और न दावेदार।