Fri. Jul 3rd, 2020

आदिवासी अंचल के लोगों ने सजा लिया आशियाना

वरदान साबित हुआ लॉकडाउन

सांध्य ज्योति संवाददाता
जयपुर, 29 जून। कोरोना वायरस संक्रमण रोकने के लिए लागू हुए लॉकडाउन के बाद अब पूरा देश अनलॉक की तरफ तेजी से बढ़ रहा है। देश में लॉकडाउन लागू किए जाने के सरकार के निर्णय को कई लोग सही तो कई लोग गलत भी ठहरा रहे हैं लेकिन बात अगर उदयपुर जिले के आदिवासी अंचल की करें तो लॉकडाउन यहां के कई परिवारों के लिए वरदान साबित हुआ है। लॉकडाउन के समय पर सदुपयोग कर सैकड़ों परिवारों ने अपनी लिए नया आशियाना बना दिया, जिससे अब उन्हें रहने के लिए छत नसीब हुई है। उदयपुर जिले के सैकड़ों आदिवासी परिवार के लोगों के सिर पर छत जरूर दे दी और अब वे परिवार के साथ अपने पुराने कच्चें मकान को छोड़ पक्के मकान में रह रहे है। लॉकडाउन के दौरान देश में सब कुछ बंद था और लोग अपने अपने घरों में बैठे थें। लॉकडाउन का यह समय सभी ने अपनी अपनी रूचि के अनुसार बिताया। ऐसे में दिहाड़ी मजदूर कर कई लोगों के अशियानों को सजाने वाले मजदूरों को अपना आशियाना बनाने का समय मिल गया। लॉकडाउन के चलते वे घर से बाहर नहीं निकल पाए। ऐसे में उन्होने इस समय का उपयोग अपने घर को दूरस्त करने में लगा दिया तो कई लोगों ने अपने लिए नया घर ही बना लिया।

समय का उपयोग
आदिवासी समूदाय के ये लोग दिहाड़ी मजदूरी कर अपने परिवार को पालन पोषण करते हैं। परिवार की जिम्मेदारी को पूरा करने के बीच वे अपने घर को दुरस्त करने के लिए समय नहीं निकाल पाते हैं, जिसके चलते वे कच्चे और टूटे-फूटे मकान में रहने को मजबूर थे लेकिन लॉकडाउन में मिले समय का इन्होंने उपयोग अपना मकान बनाने में कर लिया। उदयपुर जिले के आदिवासी इलाकों की बात करें तो लॉकडाउन के दौरान यहा बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोगों ने अपने मकान बनाए, जिसमें परिवार के सदस्यों और रिश्तेदारों ने भी एक-दूसरे को काम के बदले काम के रूप में सहयोग कर अपना फर्ज निभाया।