September 23, 2020

आदिवासी क्षेत्र में बीटीपी की गतिविधियों से नाखुश कांग्रेस और भाजपा के नेता

सांध्य ज्योति संवाददाता
जयपुर, 9 सितम्बर। राजस्थान के आदिवासी इलाके में सक्रिय भारतीय ट्राइबल पार्टी (बीटीपी) की गतिविधियों से कांग्रेस और भाजपा दोनों ही पार्टियों के नेता नाखुश है। कांग्रेस नेताओं की पीड़ा यह है कि बीटीपी के दो विधायक अशोक गहलोत सरकार को समर्थन कर रहे हैं, लेकिन आदिवासी इलाकों में वे पार्टी को नुकसान पहुंचा रहे हैं। बीटीपी कांग्रेस के वोट बैंक में सेंध लगा रही है। गहलोत सरकार को समर्थन देने के बदले बीटीपी के दो विधायक अपनी मन-मर्जी के विकास कार्य ग्रामीण क्षेत्रों में करा रहे हैं ।

इसका असर यह हो रहा है कि आदिवासी कांग्रेस नेताओं के बजाय बीटीपी के विधायकों को अपना अधिक हितैषी मानने लगे हैं। बीटीपी आदिवासियों के बीच लगातार कांग्रेस को कमजोर कर खुद की जड़े मजबूत कर रही है। कांग्रेस और भाजपा दोनों ही पार्टियों के नेताओं को बीटीपी की गतिविधियों को लेकर भी आपत्ति है। बीटीपी कार्यकर्ताओं द्वारा धार्मिक स्थलों पार्टी के झंडे लगाना व साधु-संतों के साथ मारपीट की घटनाएं लगातार हो रही है। दोनों ही पार्टियों के नेताओं का आरोप है कि बीटीपी के कार्यकर्ता सामाजिक सौहार्द बिगाडऩे में जुटे हैं।

राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता गुलाबचंद कटारिया ने पुलिस महानिदेशक भूपेंद्र यादव को पत्र लिखकर उदयपुर सम्भाग में बीटीपी के कार्यकर्ताओं द्वारा कथित तौर पर की जा रही समाज विरोधी गतिविधियों से अवगत कराया। पत्र में लिखा गया है कि क्षेत्र के जनजातीय समाज के संतों-महंतों ने बीटीपी पर वैधानिक कार्रवाई की मांग करते हुए जिला कलेक्टर को राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा है। उन्होंने बताया कि बीटीपी समर्थक लगातार दक्षिण राजस्थान में जनजातीय संस्कृति को नुकसान पहुंचाकर समाज में वैमनस्य पैदा करने का प्रयास कर रहे हैं। सोशल मीडिया से अनर्गल संदेश प्रसारित कर सामाजिक सौहार्द बिगाडऩे की भी कोशिश कर रहे हैं। बीटीपी समर्थकों ने क्षेत्र के विभिन्न मंदिरों में पताके को हटाकर अराजकता फैलाने वाले नारे लगाए।

कांग्रेस नेता दुविधा में
कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्य रघुवीर मीणा, पूर्व सांसद ताराचंद भगोरा, पूर्व मंत्री दयाराम परमार व मांगीलाल गरासिया जैसे आदिवासी नेताओं की दुविधा यह है कि बीटीपी के दो विधायक रामप्रसाद व राजकुमार रोत अशोक गहलोत सरकार को समर्थन दे रहे हैं। इनकी मर्जी से आदिवासी इलाकों में काम कराए जा रहे हैं। वहीं कांग्रेस के नेताओं की सिफारिश को सरकार में अधिक महत्वव नहीं मिल पा रहा।