September 23, 2020

आयकर विभाग के हुए दो भाग, टैक्सपेयर का काम होगा आसान

सांध्य ज्योति संवाददाता
जयपुर, 2 सितम्बर। करदाताओं को राहत देने और टैक्सेशन व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए केन्द्रीय वित्त मंत्रालय की गाइडलाइन और दिशा निर्देशों को राजस्थान में लागू करने की कवायद शुरू कर दी गई है। आजादी के बाद पहली बार राजस्थान में आयकर विभाग में बड़ा परिवर्तन कर दिया गया है। आयकर विभाग की नई व्यवस्था में करदाताओं को राहत और टैक्सेशन व्यवस्था उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।

ट्रांसपेरेन्ट टैक्स प्लेटफॉर्म और इनकम टैक्स चार्टर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रत्यक्ष करों में पारदर्शिता लाने के लिए ट्रांसपरेन्ट टैक्स प्लेटफॉर्म और इनकम टैक्स चार्टर लाने से पूरे देश में आजादी के बाद पहली बार बड़ा परिवर्तन किया गया है। राजस्थान क्षेत्रीय आयकर मुख्यालय में भी ये परिवर्तन शुरू हो गए हैं। नई टैक्स व्यवस्था के हिसाब से राजस्थान आयकर विभाग को दो भागों में बांट दिया गया है। आयकर विभाग की पहली यूनिट का नाम है – रीजनल असेसमेंट यूनिट। नई व्यवस्था के अनुसार रीजनल असेसमेंट यूनिट का स्थानीय करदाताओं से कोई संबंध नहीं होगा। आयकर विभाग की दूसरी यूनिट का नाम हैज्यूरिडिक्शन यूनिट। इसमें आयकर अधिकारी, सहायक आयकर आयुक्त और आयकर उप आयुक्त स्तर के अधिकारी होंगे। इस यूनिट के पास असेसमेंट के अलावा अन्य सभी कामों के लिए क्षेत्राधिकार होंगे।

केंद्र के निर्देशों पर बदलाव
केन्द्रीय वित्त मंत्रालय की नई गाइडलाइन के दिशा-निर्देशों के तहत आयकर विभाग में आमूल-चूल परिवर्तन किया गया है। विभाग की नई व्यवस्था का मकसद प्रत्यक्ष कर के करदाताओं को करप्रणाली में पारदर्शिता उपलब्ध कराने, टैक्सेशन के मामले में करदाताओं और विभागीय अधिकारियों के बीच सीधे संपर्क को समाप्त करने, करदाताओं के टैक्सेशन में किसी विवाद को दूर करने के लिए अंतिम छोर तक सुनवाई का अधिकार देने की व्यवस्था की गई है।

प्रधान आयकर आयुक्त प्रथम के क्षेत्राधिकार
आयकर विभाग की प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है। अकेले जयपुर जोन की जिम्मेदारी दो वरिष्ठ आईआरएस अधिकारियों के पास रहेगी। जयपुर में अब प्रधान आयकर आयु्क्त प्रथम एवं प्रधान आयकर आयुक्त द्वितीय के कार्यालय होंगे। इसमें भी प्रधान आयकर आयु्क्त प्रथम का क्षेत्राधिकार नया निर्धारित किया गया है। प्रधान आयकर आयुक्त प्रथम के क्षेत्राधिकार में रेंज-1, अलवर है जो पहले अलवर प्रधान आयकर आयु्क्त के क्षेत्राधिकार में आता था। अर्थात अलवर, भरतपुर, धौलपुर, दौसा व जयपुर जिले की कोटपूतली, शाहपुरा, विराटनगर तहसील अब जयपुर प्रधान आयकर आयुक्त प्रथम के क्षेत्राधिकार में शामिल हो गए हैं। प्रधान आयकर आयुक्त प्रथम के क्षेत्राधिकार में अलवर को शामिल करते हुए कुल 6 नए आयकर वॉर्ड्स और नए आयकर सर्किल बनाए गए हैं। नए वॉर्डस के नाम बेहरोड़, भिवाड़ी, दौसा, भरतपुर, अलवर 1(1), अलवर 1(2) रखे गए हैं। प्रधान आयकर आयुक्त प्रथम की रेंज-1 में जयपुर के प्रधान आयकर आयुक्त का पुराना क्षेत्राधिकार बना रहेगा। इसमें 5 आयकर वॉर्ड व एक आयकर सर्कल होगा जबकि पुरानी क्षेत्राधिकार की रेंज-1, 2, 3 के 15 वॉर्डस को अब 5 वॉर्डस में बांट दिया गया है।

प्रधान आयकर आयुक्त द्वितीय के क्षेत्राधिकार
जयपुर जिले के प्रधान आयकर आयुक्त द्वितीय के क्षेत्राधिकार की नई सीमाएं निर्धारित की गई । इनके क्षेत्राधिकार में रेंज-2 को शामिल किया गया है, जिसमें जयपुर की पुरानी रेंज 5 व 7 नए वॉर्ड बनाए गए हैं। नए वॉर्ड्स का नाम वॉर्ड 5(1), वॉर्ड 5(2), टोंक, व वॉर्ड 7(1), 7(2) रखा गया है। प्रधान आयकर आयुक्त द्वितीय के क्षेत्राधिकार में ही आयकर रेंज-3 को रखा गया है, जिसमें जयपुर जोन की पुरानी रेंज-6 के ही 5 वॉर्ड बना दिए। जिनके नाम वॉर्ड संख्या 6(1), वॉर्ड संख्या 6(2), वॉर्ड संख्या 6(3), वॉर्ड संख्या 6(4), वॉर्ड संख्या 6(5) व एक सर्कल बनाया गया है। प्रधान आयकर आयुक्त द्वितीय के क्षेत्राधिकार में ही रेंज-4 को रखा गया है जिसमें जयपुर जोन की पुरानी रेंज 4 जयपुर, रेंज सीकर, रेंज झुन्झुनू (जिसमें चुरू व झुंझुनूं जिले) के 6 वॉर्ड व एक सर्कल बनाए गए हैं। जिनके नाम नीम का थाना, चुरू, झुन्झुनू , सीकर व वॉर्ड संख्या 4(1), वॉर्ड संख्या 4(2) रखे गए हैं।