Mon. Feb 18th, 2019

इस साल बढ़ेगी कृषि उत्पाद कंपनियों की बिक्री

मुंबई , (एजेंसी)। लगभग दो साल की सुस्ती के बाद कृषि उत्पाद कंपनियां फसलों में कीटों के हमले के बाद अब बिक्री में सुधार की मदद से चालू वित्त वर्ष के दौरान अपने राजस्व और मुनाफे में तेजी दर्ज करने के लिए तैयार हैं। कृषि-केंद्रित कई कंपनियों ने बिक्री में सुधार के साथ अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में अपने कारोबार और मुनाफे में तेज वृद्घि दर्ज की है। इंसेक्टीसाइड्स इंडिया राजस्व और शुद्घ लाभ दिसंबर तिमाही में 22.6 प्रतिशत और 75 प्रतिशत तक बढ़कर 216 करोड़ और 17 करोड़ रुपये पर रहा। इसी तरह यूपीएल लिमिटेड का कुल राजस्व दिसंबर 2018 की तिमाही में बढ़कर 2,216 करोड़ रुपये पर पहुंच गया जो पिछले साल की समीक्षाधीन अवधि में 1,942 करोड़ रुपये था। भारत में कृषि क्षेत्र को बारिश की किल्लत वाले महाराष्ट्र में कपास फसल को पिंक बॉलवोर्म कीड़े के हमले का सामना करना पड़ा और तब इस वजह से राज्य के सूखा प्रभावित जिलों में 50 प्रतिशत से ज्यादा खड़ी फसल खराब हो गई थी। इसी तरह महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में गन्ने की फसल पर व्हाइट ग्रब कीड़े का प्रकोप देखा गया था। मॉनसून के दौरान असमान बारिश से गुजरात, मध्य प्रदेश और राजस्थान के कई हिस्सों में कृषि फसलें प्रभावित हुईं। एमके ग्लोबल फाइनैंशियल सर्विसेज के विश्लेषक अमर मौर्य ने कहा, वित्त वर्ष 2019 की तीसरी तिमाही में कंपनियों द्वारा मिश्रित वित्तीय परिणाम दर्ज किए जाने की संभावना है।
घरेलू बाजार-केंद्रित कंपनियों पर दबाव देखा जा सकता है और उनका राजस्व सपाट बना रह सकता है। वहीं मजबूत निर्यात उपस्थिति वाली कंपनियां घरेलू बाजार में गिरावट की आंशिक तौर पर भरपाई करने में सक्षम रहेंगी। समेकित आधार पर, हमें वित्त वर्ष 2019 की तीसरी तिमाही के दौरान राजस्व/एबिटा में सालाना आधार पर 12-16 प्रतिशत वृद्घि का अनुमान है। पूरे भारत में हमारे एग्री-डीलर चैनल-चेक्स के आधार पर, घरेलू कीटनाशक बाजार एक अंक में बढ़ रहा है और मुख्य रूप से यह नए और कॉम्बिनेशन मोलीक्यूल पर केंद्रित है। डीलरों का कहना है कि कंपनियां ऐसे नए मोलीक्यूल/पेटेंट प्राप्त उत्पाद पेश कर रही हैं जो अच्छी बाजार भागीदारी में सक्षम हैं, और इस तरह का बदलाव कॉम्बिनेशन उत्पादों के संदर्भ में अधिक देखा जा रहा है। हालांकि मौर्य निवेशकों को निर्यात राजस्व की अच्छी भागीदारी वाली कंपनियों का चयन करने की सलाह दे रहे हैं। वैश्विक कृषि बाजार परिदृश्य में बदलाव (निर्यात मांग में तेजी और वैश्विक इन्वेंट्री में कमी के साथसाथ मुख्य कच्चे माल की उपलब्धता में कमी) के बाद कुछ बिजनेस मॉडल शेयरधारक वैल्यू तैयार करने में अप्रभावी बन गए हैं।