November 23, 2020

ऊंट गाड़ी सभा में किसान विधेयक बिल का विरोध

किसानों ने जताया आक्रोश

सीकर, (निसं.)। शहर के साथ ही प्रदेशभर में केन्द्र सरकार के तीनों किसान विधेयकों का विरोध दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। इस दौरान प्रदेश की कांग्रेस सरकार भी इन विधेयका का सभी जिला मुख्यालयों पर विरोध कर रही है तो किसान भी प्रदर्शन करने में लगे हुए है। सीकर उपखंड के गांव सेवद छोटी सहित अन्य गांवों में केन्द्र सरकार द्वारा पारित किसान विधेयक बिल के विरोध में कांग्रेस सेवादल द्वारा ऊंट गाड़ी सभा का आयोजन किया गया। इसमें कृषि बिल के प्रति किसानों ने आक्रोश व्यक्त किया गया तथा पंचायत समिति व जिला परिषद् सदस्य चुनावों में भाजपा का कड़ा विरोध किया जाएगा। ऊंट गाड़ी सभा को कांग्रेस सेवादल जिलाध्यक्ष नरेंद्र बाटड़ सहित किसानों ने सम्बोधित किया। वक्ताओं ने कहा इस बिल में एमएसपी का उल्लेख नहीं किया गया। इसका मतलब आगे एमएसपी को खत्म करने की साजिश रची गई है। इस बिल में उद्योग कंपनियों के लिए सभी खाद्य पदार्थों को अनलिमिटेड स्टॉक रखने की खुली छूट दि गई है, इससे बाजार में काला बाजारी मंहगाई उच्च स्तर पर बढ़ेगी। इस बिल में किसान व कंपनी के बीच विवाद होने पर किसान सिविल न्यायालय नहीं जा सकता केवल सरकार के प्रशासनिक अधिकारी को फरियाद दे सकता है। इस बिल से किसान मंडी व्यवस्था खत्म हो जाएगी और फिर ये ही मंडियां रेल्वे एअरपोर्ट की तरह इन्हीं अंबानी अडानी जैसे उद्योगपतियों को खाद्य स्टॉक के लिए बेच दी जाएगी। इसलिए केन्द्र सरकार द्वारा पारित किसान विधेयक बिल किसानों के लिए एक काला कानून है।

उद्योगपति कंपनियों के लिए बनाया बिल
सेवादल जिलाध्यक्ष बाटड़ ने कहा कि ये कृषि बिल किसानों के फायदे का ना बनाकर केवल उद्योगपती कंपनियों के लिए बनाया गया है। सेवादल द्वारा इस बिल के प्रति किसानों को जागरूक करने के लिए जिले में चलाए जा रहे कार्यक्रमों के तहत शहरों में मुख्य बाजार नुकड सभा, गांव चौपाल में खाट व ट्रेक्टर सभा तथा ढाणीयों में ऊंट गाड़ी सभा का आयोजन किए गए, जंहा किसानों में भारी आक्रोश देखने को मिला और पंचायत समिति व जिला परिषद् सदस्य चुनावों में किसान मजदूर व आमजन लोग भाजपा को सबक सिखाने का निर्णय लिया है। इस दौरान ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष बुन्दु खान राजास, नेछवा ब्लॉक सेवादल अध्यक्ष नन्दु सिंह शेखावत, एडवोकेट सुरेश भास्कर, जीतु भोजासर, राधेश्याम पुरोहित बठोठ, मेघाराम छब्बरवाल, सांवरमल छब्बरवाल, दानाराम बीस्सू, मालाराम बीस्सु, नारायण छब्बरवाल सहित अन्य लोगों ने विचार व्यक्त किए।