Wed. Sep 18th, 2019

एक को मोक्ष धाम पहुंचाने के लिए सैकड़ों लोग करते मौत का सफर

अब इसे मजबूरी कहें या फिर रेल प्रशासन व अधिकारियों की लापरवाही

रींगस (निसं.)। कस्बेवासियों को सौगात कहें या आजाद भारत देश में आज भी जिंदा लोगों को मौत के सफर का सामना करने की मजबूरी जी हां ऐसा इसलिए कहना पड़ रहा है, क्योंकि रींगस कस्बा रींगस रेलवे स्टेशन की वजह से दो भागों में बट गया है। रींगस के 19 वार्ड एक तरफ है। वहीं 6 वार्ड रेलवे स्टेशन के दूसरी तरफ में है। दोनों ही तरफ हजारों लोग रहते हैं। दोनों ही तरफ लोगों का आना जाना लगातार जारी रहता है, लेकिन अब रींगस रेलवे स्टेशन के विस्तार से लोग मानों जैसे भारत-पाकिस्तान की सीमा रेखाओं में बैठ गए हो, क्योंकि कस्बे के पूर्व दिशा में अस्पताल, नगरपालिका, महाविद्यालय, विद्यालय एव एक दर्जन बैंक यहां तक कि जयपुर जाने के लिए 6 वार्ड के लोगों को या तो डेढ़ किलोमीटर लंबी पुलिया पार करके आए या फिर रेलवे स्टेशन पर लाइने पार करते हुए पूर्व दिशा में आए। यहां तक तो सब ठीक है, लेकिन तब क्या हो जब किसी के घर में मौत हो जाए और उसे पूर्व दिशा में स्थित भेरूजी के श्मशान घाट में लाने के लिए लोगों को मौत के सफर का सामना करना पड़े क्योंकि पुलिया के ऊपर से शव को कंधों पर ले जाना संभव नहीं है। वहीं पर रेल लाइनों को पार करके आए तो हर पल मौत का डर बना रहता है पर ना तो रेलवे प्रशासन को इसकी चिंता है और ना ही रेल मंत्री और अधिकारियों को।

घुट-घुट कर जीने को मजबूर
रींगस के लोग घुट घुट कर जीने को मजबूर हैं अब तो सब यही कहने लगे हैं कि किसी एक को मोक्ष धाम पहुंचाने के लिए सैकड़ों लोगों को मौत के सफर का सामना करना पड़ता है। यह हालात तब है जब सीकर सांसद ने भी रींगस कस्बावासियों से सैकड़ों वादे किए, लेकिन समस्या का समाधान आज तक नहीं हुआ। रींगस कस्बे के लोगों ने सैकड़ों ज्ञापन डीआरएम, सीआरएस, रेल मंत्रालय तक भेज दिए, लेकिन आज तक कोई सुनवाई नहीं हुई। यहां तक कि कस्बावासियों ने धरना प्रदर्शन भी किया लेकिन रेलवे के अधिकारी राजकार्य में बाधा डालने का मुकदमा दर्ज करने की धमकी देकर के प्रदर्शनकारियों व धरना देने वाले लोगों को भी भगा देते हैं। साथ ही साथ हालात इतने बद बदतर हो गए हैं कि कॉलेज स्कूल में आने वाली छात्राओं को भी ट्रेनों को पार करके ही आना पड़ता है। जिससे उनके मन में भी हर समय भय बना रहता है। कई छात्राओं ने इस समस्या के चलते अपनी पढ़ाई बीच में छोड़ दी है। ऐसे में बुजुर्ग लोगों की समस्या तो तब और भी बढ़ जाती है। जब उन्हें इस पार से उस पार जाना हो तो उन्हें रेलवे की गाडिय़ों के नीचे से निकलना पड़ता है

कब होगी समस्या का समाधान
अब देखना होगा कि रींगस के लोगों को इस सबसे बड़ी विकट समस्या से कब छुटकारा मिलता है। कब रेलवे के अधिकारी जागेंगे और लोगों की समस्या का समाधान करेंगे। लोगों का कहना है कि नीमकाथाना में अंडरपास बना हुआ है, लेकिन चालू नहीं हुआ। श्रीमाधोपुर में अंडरपास बना हुआ है जो शुरू भी हो गया है। परंतु रींगस में आखिरकार अंडरपास क्यों नहीं बनाया गया। कहीं रेलवे के अधिकारियों की कोई मिलीभगत तो नहीं है। गौरतलब है कि रींगस में बाबा श्याम के दर्शन कर निशानों की पूजा अर्चना कर पैदल पदयात्रा करने वाले वर्ष पर्यन्त लाखों श्याम श्रद्धालु इन लाइनों को पार कर ही खाटू धाम पहुंचने को मजबूर हैं।