September 25, 2020

एक रुपया जुर्माना फिर चर्चा में

पिछले दो दिनों ने एक बहुत पुराना वाक्या इसलिए ताजा और सुर्खियों में आ गया है क्योंकि देश के सर्वोच्च न्यायालय ने एक वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण को एक रुपये का जुर्माना लगाया है। वकील पर सर्वोच्च न्यायालय की अवमानना का आरोप था और उन्हें इस पर एक रुपये का जुर्माना लगाया गया।

ब्रिटिश हुकूमत में भी लगा था एक रुपया जुर्माना, इंजीनियर बड़ोग ने अपमान मान कर ली थी आत्महत्या

सोलन, 2 सितम्बर (एजेंसी)। कालका-शिमला रेलवे खंड पर मौजूद एक ऊंचे पहाड़ पर बनी बड़ोग सुरंग की सुंदरता आज लाखों लोगों के दिलों को छू लेती है लेकिन जब उस सुरंग के इतिहास को पढ़ा जाता है तो ब्रिटिश इंजीनियर बड़ोग की कुर्बानी लोगों को हैरान कर देती है। इंजीनियर बड़ोग वह इंसान थे जिन्होंने उस समय भारत की दूसरी सबसे बड़ी रेलवे सुरंग को निकालने का जज्बा दिखाया था। इंजीनियर बड़ोग को ब्रिटिश सरकार ने इस सुरंग को बनाने का जिम्मा सौंपा। उनके नेतृत्व में यह सुरंग बनाई जा रही थी। विशालकाय पहाड़ का पूरा दौरा किया गया और उसके बाद इंजीनियर बड़ोग ने दोनों छोरों पर निशान लगाकर खुदाई का काम शुरू करवा दिया।कई महीनों तक खुदाई का काम चलता रहा और खुदाई किसी निर्णायक मोड़ पर नहीं पहुंची तो इसकी इंसपेक्शन की गई। पता चला कि सुरंग के दूसरे छोर की दिशा बदल गई है और कई फीट खुदाई गलत दिशा में हो गई है। तब ब्रिटिश सरकार ने कर्नल बड़ोग पर पैसे और समय की बर्बादी का आरोप लगाया और उन पर एक रुपये का जुर्माना लगा दिया। कर्नल बड़ोग मेहनती और ईमानदार इंजीनियर माने जाते थे। जुर्माने का दुख वह सह नहीं सके। इसके चलते उन्होंने वर्ष 1900 में सुरंग के मध्यांतर में पहले अपने कुत्ते को गोली मारी। जब उसकी जान चली गई तो उन्होंने खुद को भी गोली मारकर खत्म कर दिया। ब्रिटिश सरकार ने सुरंग निर्माण का कार्य मुख्य अभियंता एचएस हैरिंगटन को सौंपा। उन्होंने स्थानीय साधु भलकु के मार्गदर्शन में बड़ोग सुरंग का निर्माण कार्य पूरा किया आज पूरी दुनिया सुरंग देखने पहुंचती है और इंजीनियर बड़ोग की ईमानदारी और इतिहास की प्रशंसा करती है। यह सुरंग 1143.61 मीटर लंबी है और इसे 1903 में पूरा कर दिया गया था।