September 25, 2020

एलजेपी-जेडीयू में तल्खी काफी बढी़

पटना, 9 सितम्बर (एजेंसी)। बिहार की राजनीति के लिहाज से वर्तमान में दो बड़े प्रश्न सबसे ज्यादा अहम है। पहला ये कि क्या चिराग पासवान की लोक जन शक्ति पार्टी एनडीए का हिस्सा रहेगी अथवा नहीं? दूसरा ये कि क्या लोजपा एनडीए में रहकर ही जेडीयू के प्रत्याशियों के खिलाफ अपने प्रत्याशी उतारेगी। ये दोनों ही सवाल इसलिए उभरकर सामने आ रहे हैं क्योंकि एलजेपी और जेडीयू में तल्खी काफी बढ़ गई है। खासकर जीतन राम मांझी के एनडीए में शामिल होने और उनका चिराग पासवान पर लगातार बयान देने के बाद दोनों ही पार्टियों के नेताओं के बीच भी तीखे बयानों का सिलसिला लगातार जारी है। अब चर्चा है कि लोजपा बिहार के 143 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारने की घोषणा कर सकती है। दूसरी चर्चा ये भी है कि अगर विपरीत हालात बने तो चिराग एनडीए छोडऩे का भी ऐलान कर सकते हैं। सोमवार को चिराग पासवान की अध्यक्षता में लोजपा के बिहार संसदीय दल की बैठक में अधिकतर सदस्यों की राय थी कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में चुनाव नहीं लडऩा चाहिए, क्योंकि लॉकडाउन और बाढ़ से नीतीश की छवि पर नकारात्मक असर पड़ा है। बैठक में प्रस्ताव भी पारित हुआ कि लोजपा 143 सीट पर प्रत्याशियों की सूची तैयार कर जल्द केंद्रीय संसदीय बोर्ड को भेज देगी। साथ ही बिहार में गठबंधन के बारे में अंतिम फैसला लेने का अधिकार भी बिहार संसदीय बोर्ड ने चिराग पासवान को सौंप दिया।

पिता का ख्याल
दूसरी तरफ, लोजपा के सूत्रों का कहना है कि जिन 143 सीट पर अपने उम्मीदवारों की सूची तैयार कर रही है, यह सभी सीट वे हैं, जिन पर भाजपा चुनाव नहीं लड़ेगी। इस तथ्य के आधार पर ही जानकार कहते हैं कि चिराग सीएम नीतीश से अदावत तो दिखा रहे हैं, पर एनडीए छोडऩे का रिस्क नहीं उठाएंगे।अभी केंद्र में 4 साल एनडीए सरकार रहेगी। ऐसे में वह कोई ऐसा फैसला नहीं करेंगे कि लोजपा केंद्र की राजनीति से बाहर हो जाए और उनके पिता रामविलास पासवान को केंद्रीय मंत्री का पद गंवाना पड़े।