September 23, 2020

एसी कोच में अब कंबल, चादर, तकिया नहीं मिलेगा ?

रेलवे कर सकता है हमेशा के लिए बंद

सांध्य ज्योति संवाददाता
जयपुर, 31 अगस्त। देश-दुनिया में जारी कोरोना वायरस महामारी के कारण कई चीजों में बदलाव हो रहे हैं। ये बदलाव विभिन्न क्षेत्रों में हो रहे हैं। इसी के चलते भारतीय रेलवे में भी कुछ बदलाव होने की संभावना है। अभी रेलवे कोरोना महामारी के कारण स्पेशल ट्रेनें चला रहा है लेकिन अब कहा जा रहा है कि महामारी के बाद भी जब रेल सेवाएं सुचारू होंगी तब रेलवे एयरकंडीशंड कोच (एसी) में यात्रियों को कंबल, तौलिया, चादर, तकिया देना हमेशा के लिए बंद कर सकता है। हालांकि अभी इस पर आधिकारिक फैसला होना है। हाल ही में रेलवे बोर्ड के शीर्ष अफसरों के बीच हुई हाई लेवल मीटिंग में इस बात पर चर्चा हुई है। बैठक में शामिल तीन अफसरों ने सूत्रों को बताया है कि इस दिशा में रेलवे आगे बढ़ रहा है। सूत्रों ने कहा कि देश में बिल्ड ऑपरेट ऑन ट्रांसफर मॉडल के तहत लिनेन को धोने के लिए मैकेनाइज्ड मेगा लॉन्ड्री के साथ क्या करना है, यह तय करने के लिए एक समिति बनाई जा रही है।
रेलवे ने अनुमान जताया है कि प्रत्येक लिनेन सेट को धोने के लिए 40-50 रुपये खर्च आता ह। अनुमान के मुताबिक वर्तमान में लगभग 18 लाख लिनन सेट फील्ड में हैं। एक कंबल लगभग 48 महीनों तक सेवा में रहता है और महीने में एक बार धोया जाता है। सूत्रों ने कहा कि अभी फिलहाल कोई नया लिनेन आइटम नहीं खरीदा जा रहा है।
पिछले कुछ महीनों में लगभग 20 रेलवे डिवीजनों ने निजी वेंडरों को सस्ते दामों पर स्टेशनों पर डिस्पोजेबल कंबल, तकिए और चादरें बेचने का ठेका दिया है। पूर्व मध्य रेलवे के दानापुर डिवीजन में पांच ऐसे वेंडर हैं, जो रेलवे को प्रति वर्ष लगभग 30 लाख रुपये का भुगतान करते हैं। पूरे भारत में लगभग 50 ऐसे वेंडरों ने रेलवे स्टेशनों में दुकान खोली हैं। अधिकारियों ने कहा कि खर्च के बजाय यह विकल्प लिनेन प्रबंधन को किराया से इतर राजस्व कमाने के अवसर में बदल देता है। एक अधिकारी ने कहा कि एसी डिब्बों में आधुनिक तापमान नियंत्रण सेटिंग्स के साथ कंबल की आवश्यकता को समाप्त किया जा सकता है।