October 28, 2020

ऐसा था गांधी जी का खानपान : 21 दिन तक रखा था उपवास

सांध्य ज्योति डेस्क

आज पूरा देश राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती का जश्न मना रहा है। 2 अक्टूबर 1869 में गुजरात के पोरबंदर में पैदा हुए मोहनदास करमचंद गांधी को पूरी दुनिया अहिंसा के पुजारी के रूप में पूजती है। भारत की आजादी में महात्मा गांधी के अतुल्य योगदान पर हर भारतीय को गर्व है।
महात्मा गांधी अपने सादा-जीवन और उच्च विचारों के चलते प्यार से भारतीयों के बापू बन गए। महात्मा गांधी ने ही विश्व को सत्य की शक्ति से परिचय करवाया। गांधी के सत्याग्रह की ही बदौलत अंग्रेज भारत छोडऩे पर मजबूर हो गए। गांधी जी शाकाहारी थे और अपने जीवन के एक वक्त में उन्होंने चाय और कॉफी तक का त्याग कर दिया था। खान-पान के साथ गांधीजी ने जितने प्रयोग किए शायद ही दुनिया के किसी शख्स ने आहार के साथ इतने और ऐसे प्रयोग किए होंगे। महात्मा गांधी जहां चीनी के सेवन से परहेज करते थे वहीं फलों के राजा आम के प्रति अपनी तृष्णा से परहेज नहीं कर पाते थे। अपने कई लेखों में महात्मा गांधी ने इस अतिरेक के लिए अफसोस जताया है। महात्मा गांधी को आम बेहद पसंद था। गांधीजी ने दूध का सेवन भी बंद कर दिया था। कस्तूरबा गांधी के कहने पर महात्मा गांधी बकरी का दूध पीने के लिए राजी हुई थे।
लेखक निको स्लेट ने महात्मा गांधी की डाइट पर लिखी किताब में कहा है कि स्वस्थ खाना गांधीजी की जिंदगी का अहम हिस्सा था। बचपन से ही महात्मा गांधी की स्वस्थ खाने के प्रति रुचि विकसित हो गई थी। महात्मा गांधी की मां धार्मिक थीं और अक्सर उपवास रखती थीं। ऐसे में वह भी अपने खानपान का विशेष ध्यान रखती थीं। स्लेट ने गांधी जी के पोषण और खानपान पर पांच साल के शोध के बाद अपनी किताब गांधीज सर्च फॉर परफेक्ट डाइट किताब लिखी है।
गांधीजी को पता था कि उनके पसंदीदा फल और सब्जियों में प्राकृतिक तौर पर नमक होता है इसलिए वह अपने भोजन में अतिरिक्त नमक लेने से परहेज करते थे।  स्लेट के मुताबिक, महात्मा गांधी ने 1911 से ही नमक फ्री डाइट लेनी शुरू कर दी थी।  हालांकि 1920 के बाद गांधी जी ने अपने डाइट में हल्का नमक लेना शुरू किया था। वह अपनी डाइट में प्रति दिन 30 ग्रेन (दाने) से ज्यादा नमक नहीं
लेते थे।
महात्मा गांधी ने खुद लिखा है कि वह अपनी डाइट में 8 टोल अंकुरित गेहूं, 8 टोल बादाम पेस्ट के लिए, हर पत्ते के 8 टोल, छह खट्टे नींबू और 2 औंस शहद लेते थे। गांधी जी अपना पहला भोजन 11 बजे और दूसरा शाम को 6.15 बजे लेते थे। गांधी जी दिन में शहद और नींबू के साथ गर्म पानी लेते थे। गांधी जी ने आजादी मिलने से पहले कई उपवास रखे। आजादी के लिए संघर्ष के दौरान महात्मा गांधी ने 17 बार उपवास रखा और उनका सबसे लंबा उपवास 21 दिन का था। महात्मा गांधी ने 1913 से लेकर 1948 यानी की आजादी मिलने के बाद भी उपवास रखा। अहिंसा के इस पुजारी ने खानपान के साथ जितने प्रयोग किए शायद ही इतिहास में किसी महापुरुष ने फूड के साथ इतने प्रयोग किए हों! महात्मा गांधी का मानना था कि जिस तरह से जिंदा रहने के लिए हमें हवा और पानी की जरूरत पड़ती है उसी तरह से शरीर को भी पौष्टिक तत्वों की जरूरत होती है। ये ही वजह थी कि वह खानपान को विशेष महत्व देते थे।