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ऑर्बिटर काट रहा है चन्द्रमा का चक्कर भेज सकता है चांद के फोटो

बेंगलुरू, 7 सितम्बर (एजेंसी)। चंद्रयान 2 के लैंडर विक्रम का संपर्क क्यों टूट गया या फिर वो दुर्घटनाग्रस्त तो नहीं हुआ अभी भले इसकी कोई जानकारी नहीं है लेकिन 978 करोड़ रुपए लागत वाला चंद्रयान-2 मिशन में अभी सब कुछ खत्म नहीं हो गया है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के एक अधिकारी ने बताया कि मिशन का सिर्फ पांच प्रतिशत -लैंडर विक्रम और प्रज्ञान रोवर का नुकसान हुआ है, जबकि बाकी 95 प्रतिशत चंद्रयान-2 ऑर्बिटर अभी भी चंद्रमा का सफलतापूर्वक चक्कर काट रहा है। इस साल ऑर्बिटर चंद्रमा की कई तस्वीरें लेकर इसरो को भेज सकता है। अधिकारी ने बताया कि ऑर्बिटर लैंडर की तस्वीरें भी लेकर भेज सकता है, जिससे उसकी स्थिति के बारे में पता चल सकता है। चंद्रयान-2 अंतरिक्ष यान में तीन खंड हैं-ऑर्बिटर (2,379 किलोग्राम, आठ पेलोड), विक्रम (1,471 किलोग्राम, चार पेलोट) और प्रज्ञान (27 किलोग्राम, दो पेलोड)। ऑर्बिटर यहां कई अहम जिम्मेदारियों को अंजाम देगा। ऑर्बिटर बेंगलुरु में स्थित इंडियन डीप स्पेस  नेटवर्क (आइएसडीएन) से संपर्क में रहेगा। इस पर लगे हुए पेलोड कई काम करेंगे। चंद्रयान-2 पर लगा लार्ज एरिया सॉफ्ट एक्सरे स्पेक्ट्रोमीटर यहां सतह पर पडऩे वाले सूर्य के प्रकाश के आधार पर यहां मौजूद मैग्नीशियम, एल्यूमिनियम, सिलिकॉन आदि का पता लगाएगा। यान पर लगा लगा पेलोड टेरेन मैपिंग कैमरा हाई रिजॉल्यूशन तस्वीरों की मदद से चांद की सतह का नक्शा तैयार करेगा। इससे चांद के अस्तित्व में आने से लेकर इसके विकासक्रम को समझने में मदद मिलेगी। इमेजिंग आइआरएस स्पेक्ट्रोमीटर की मदद से यहां की सतह पर पानी और अन्य खनिजों की उपस्थिति के आंकड़े जुटाने में मदद मिलेगी।