September 23, 2020

औषधीय पौधों की खेती ने किया मालामाल

25 से ज्यादा जड़ी-बूटियां उगा रहा यह किसान

करीब 28 साल पहले पांच बीघे जमीन में औषधीय पौधों की खेती की शुरुआत करने वाले अशोक चौहान एक वक्त खेती में काफी नुकसान झेल रहे थे, फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी। यही वजह रही कि आज वह न सिर्फ 110 एकड़ में 25 से ज्यादा औषधीय पौधों की खेती कर रहे हैं, बल्कि 300 से ज्यादा लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं। उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले का यह किसान सिर्फ मेरठ में ही नहीं, बल्कि मथुरा, सहारनपुर और उत्तराखंड में भी औषधीय पौधे उगा रहा है। यही वजह है आज उनकी खेती की उपज दिल्ली, राजस्थान जैसे राज्यों के बाजारों में भी जाती है और उसकी अच्छी कीमत भी मिलती है। आज किसान अशोक चौहान के पास औषधीय पौधों की खेती की जानकारी लेने के लिए दूर-दूर से किसान आते हैं। इतना ही नहीं विदेशों से भी कई लोग उनकी खेती करने के तरीके देखने और सलाह लेने के लिए आ चुके हैं। उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के दौराला के मटौर गांव के रहने वाले किसान अशोक चौहान बताते हैं, शुरुआत में पांच बीघा जमीन से औषधीय पौधों की खेती की शुरुआत की थी, उस समय लगभग एक लाख से अधिक का खर्चा आया, पहले काफी नुकसान झेलना पड़ा, जीवन में कई उतार-चढ़ाव आए, सालों कमाई नहीं हुई, मगर डटे रहे, अब मुझे गर्व महसूस होता है कि आज मैं करीब 110 एकड़ में औषधीय पौधों की खेती कर रहा हूं।
अशोक ने सबसे पहले हल्दी और तुलसी की खेती से शुरुआत की। धीरे-धीरे उन्होंने और औषधीय पौधों को भी अपनाया और अब वह सर्पगंधा, सतावरी, अकरकरा, एलोवेरा जैसी करीब 25 से अधिक मेडिसिनल प्लांट की खेती कर रहे हैं। अशोक बताते हैं, हमारे बाबाजी किसी जमाने में वैद्य का काम करते थे तो उस समय गांव के आसपास के लोग उनकी हाथ से बनी दवाई का इस्तेमाल करते थे और रोगमुक्त हो जाते थे, वह भी औषधीय पौधे अपने घर में उगाते थे जिससे गांव के आसपास के लोगों का उपचार किया जा सके। बाबा के बाद हमारे पिताजी को भी मेडिसन प्लांट का ज्ञान था तो उन्होंने भी इस कार्य को जारी रखा वह हमें भी ज्ञान देते थे कि कहीं डॉक्टर के पास आपको जाने की जरूरत नहीं है, हमारे आस-पास ऐसी औषधियां पाई जाती हैं कि जिससे हम छोटे-मोटे रोग से मुक्त हो सके।