September 20, 2020

कई बार हंगामे की भेंट चढ़ा है प्रश्नकाल

कितना हुआ नुकसान

नई दिल्ली, 7 सितम्बर (एजेंसी)। कोरोना के कारण संसद के मानसून सत्र के दौरान प्रश्नकाल को स्थगित रखा गया है। जिसके बाद विपक्षी दलों के नेताओं ने इस फैसले पर सवाल उठाए हैं। हालांकि संसद में प्रश्नकाल कई बार विपक्ष के हंगामे की भेंट चढ़ चुका है। आंकड़ों से सामने आया है कि विभिन्न संसद सत्रों के दौरान प्रश्नकाल का काफी समय बर्बाद हुआ और कितना कामकाज हुआ है। संसद में कई बार ऐसे मौके आए हैं, जब प्रश्नकाल के दौरान बहुत कम काम हुआ। लोकसभा में 2018 के शीतकालीन सत्र में प्रश्नकाल के दौरान महज 27 फीसदी कामकाज हुआ। वहीं 2018 के बजट सत्र में 11 फीसदी काम हुआ था। 2013 के शीतकालीन सत्र में 2 फीसदी और 2012 के मानसून सत्र में महज 6 फीसदी काम हुआ।

राज्यसभा में कई बार जीरो फीसदी काम
संसद सत्रों के दौरान कई बार ऐसी स्थिति भी आई है, जब राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान जीरो फीसदी काम हुआ। फरवरी 2019 में संसद के बजट सत्र के दौरान प्रश्नकाल में जीरो फीसदी कामकाज हुआ। वहीं 2016 के शीतकालीन सत्र में भी प्रश्नकाल के दौरान कोई काम नहीं हुआ। 2015 के मानसून सत्र और 2018 के बजट सत्र के दौरान राज्यसभा में क्रमश: 1 और 3 फीसदी काम हुआ। शून्यकाल के दौरान सांसद किसी महत्वपूर्ण मामले को दस दिनों की अग्रिम सूचना के बिना सदन में उठा सकते हैं जबकि प्रश्नकाल सिटिंग सेशन का पहला घंटा है जिसमें संसद सदस्य मंत्रियों से प्रश्न पूछते हैं।