September 24, 2020

कभी आंसू तो कभी दीवार पर सिर मारा

आसाराम पर अपनी किताब में आईपीएस ने किया खुलासा

सांध्य ज्योति संवाददाता
जयपुर, 28 अगस्त। कभी लाखों लोगों के लिए चमत्कारी भगवान माने जाने वाला आसाराम बापू जेल की सलाखों के पीछे कैसे पहुंचा इसको लेकर राजस्थान कैडर के भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के अधिकारी अजय पाल लांबा ने किताब लिखी है। किताब के को-ऑथर संजीव माथुर हैं। लाखों लोगों के दिलों पर राज करने वाले आसाराम के खिलाफ मामला दर्ज करने से लेकर उसको जेल तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले लांबा ने अपनी किताब में लिखा कि गिरफ्तारी के बाद कैसे आसाराम जमीन पर बैठकर रोने लगा। 5 सितंबर को प्रकाशित होने वाली इस किताब में उन्होंने लिखा, पूछताछ के दौरान फूट फूट कर रो रहे आसाराम ने पुलिस अफसरों से लेकर कांस्टेबल तक के पैर पकड़े, कभी धमकी देने लगा तो कभी दीवार पर सिर मारने लगा और कभी गाना गाने लगा।
बनायी गई टफ 20 टीम
जोधपुर में पुलिस उपायुक्त रहते हुए लांबा ने 20 अफसरों व पुलिस कर्मियों की टीम के साथ किस तरह का जाल बिछाकर आसाराम को गिरफ्तार किया। यह इस किताब में है। पुलिस की इस टीम को टफ. 20 नाम दिया गया था। वर्तमान में जयपुर में अतिरिक्त आयुक्त पद पर तैनात लांबा ने बताया,आसाराम को सजा हुई तो तब इस पर किताब लिखने का विचार मन में आया। डयूटी के बाद जब भी समय मिलता तो प्रतिदिन केस के बारे में लिखना शुरु किया। किताब लिखने का मुख्य मकसद इस तरह के कथित संतों की वजह से सभी संतों की बदनामी और भक्तों की गड़बड़ाती आस्था के बारे में सभी वर्गों को सचेत करना है। मैंने किताब लिखने का फैसला इसलिए किया क्योंकि मैं चाहता था कि आसाराम की कहानी बतायी जाए जिससे लोग जान सके कि कानून से ऊपर कोई नहीं है। मामला दर्ज होने और जांच शुरु होने से लेकर आसाराम को दोषी साबित करने तक की प्रक्रिया पुलिस और वकालात के पेशे से जुड़े लोगों के साथ ही युवाओं के काम आ सकती है। हार्पर कॉलिंस की तरफ से प्रकाशित होने वाली इस किताब की डिमांड प्रकाशन से पहले ही काफी होने लगी है ।

दबाव, प्रलोभन और धमकी
लांबा ने लिखा, मामला दर्ज होने के बाद से गिरफ्तारी और दोषी साबित करने तक जांच कर रही पुलिस टीम पर काफी दबाव आए। आसाराम के समर्थकों ने हर तरह के दबाव डलवाने के साथ ही धमकियां भी दी। पैसे का लालच भी दिया। गांव में रह रहे लांबा के माता-पिता को धमकी दी गई, लालच दिया गया। उनकी टीम में शामिल राज्य पुलिस सेवा की अधिकारी चंचल मिश्रा को फोन पर धमकियां दी गई,अपशब्द कहे गए। आसाराम ने खुद को बेकसूर साबित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। उसने खुद को नपुंसक साबित करके बचने की कोशिश की। टेस्ट हुआ जिसमें आसाराम के नपुंसक होने का बहाना झूठा निकला। आसाराम के खिलाफ गवाही देने वाले तीन लोगों की हत्या और कईयों पर हमलों के बाद अन्य को सुरक्षित कैसे रखा यह भी किताब में लिखा है। अगस्त, 2013 में आसाराम के खिलाफ दिल्ली में आईपीसी की धारा 342/376 व 508 के तहत नाबालिग के यौन उत्पीडऩ का मामला दर्ज हुआ। पीडि़ता के पिता की रिपोर्ट थी कि आसाराम ने पीडि़ता का जोधपुर स्थित आश्रम में जुलाई के अंतिम सप्ताह में यौन उत्पीडऩ किया था । मामला दिल्ली से जोधपुर ट्रांसफर हो गया। सबूत जुटाने के बाद पुलिस की टीम आसाराम की तलाश में जोधपुर, भोपाल,इंदौर,दिल्लीसहित कई शहरों में भेजी गई। 31 अगस्त, 2013 को इंदौर हवाई अड्डे से पकड़ा गया। उसे इंदौर आश्रम में ले जाया गया। पूछताछ के बाद 1 सितंबर 2013 को गिरफ्तार किया गया।