September 22, 2020

कम पानी वाली फसलों और बूंद-बूंद सिंचाई को प्रोत्साहन देने के निर्देश

मुख्यमंत्री गहलोत ने कहा, प्रगतिशील किसानों के साथ मिलकर नवाचार करें कृषि विभाग, कृषि से जुड़े विभागों की समूहवार समीक्षा बैठक

सांध्य ज्योति संवाददाता
जयपुर, 15 सितंबर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रदेश में कृषि को किसानों के लिए लाभ का व्यवसाय बनाने के लिए प्रगतिशील कृषकों के साथ मिलकर नवाचार करने, जैविक तथा प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने, भौगोलिक परिस्थितियों और जलवायु के आधार पर शोध कर फसल उत्पादन की सलाह देने पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के लिए कृषि उच्च प्राथमिकता का विषय है, क्योंकि इस क्षेत्र के विकास से ही प्रदेश और देश की तरक्की को गति मिलती है। गहलोत सोमवार को मुख्यमंत्री निवास से वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से कृषि तथा इससे जुड़े विभिन्न विभागों की समूहवार समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने अधिकारियों को विभिन्न फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीद का कवरेज बढ़ाने, फसल बीमा योजना को तर्कसंगत बनाने, कम पानी वाली फसलों एवं बूंद-बूंद सिंचाई और फव्वारा सिंचाई परियोजनाओं को प्रोत्साहन देने के लिए अभियान चलाने के निर्देश दिए।

कृषक कल्याण कोष से फसल बीमा के लिए 250 करोड़: मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के लिए प्रीमियम के रूप में बीमा कम्पनियों को देय राज्यांश के लिए 250 करोड़ रुपए ये का भुगतान सरकार द्वारा गठित कृषक कल्याण कोष से करने का निर्णय लिया। साथ ही, प्रदेश के विभिन्न जिलों में डिग्गी निर्माण के बकाया दायित्वों के भुगतान के लिए कृषक कल्याण कोष से 92.2 करोड़ रुपए की राशि भी स्वीकृत की। इन स्वीकृतियों के बाद फसल बीमा कम्पनियों को प्रीमियम तथा किसानों को डिग्गी निर्माण के लिए अनुदान का भुगतान जल्द से जल्द हो सकेगा।

50 प्रतिशत गौ संवर्धन एवं संरक्षण पर खर्च होगा: गहलोत ने स्टाम्प ड्यूटी पर देय 20 प्रतिशत अधिभार का 50 प्रतिशत हिस्सा प्रदेशभर में संचालित गौशालाओं को गायों के संरक्षण तथा गौ-वंश के संवर्धन के लिए अनुदान के रूप में देने का निर्णय भी लिया। विगत दिनों प्रदेशभर के गौशाला संचालकों तथा गौ-वंश प्रेमियों द्वारा मुख्यमंत्री को ज्ञापन आदि भेजकर इसके लिए मांग करने पर गहलोत ने यह संवेदनशील निर्णय लिया है। साथ ही, अधिभार से प्राप्त राशि का उपयोग प्राकृतिक एवं मानव निर्मित आपदाओं सूखा, बाढ़, महामारी, लोक स्वास्थ्य की तात्कालिक जरूरतों, आगजनी आदि के प्रभाव को कम करने के लिए किया जाना भी प्रस्तावित किया गया। बैठक में प्रदेश में ईज ऑफ डूइंग फार्मिंग, किसानों के लिए विभिन्न फसलों के प्रमाणित बीजों की उपलब्धता, कृषकों को नवाचारों के लिए प्रशिक्षण देने एवं प्रोत्साहित करने, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के विकल्प, किसानों से फसल उत्पादों की एमएसपी पर खरीद, कृषि प्रसंस्करण और विपणन में नवाचार, जीरो बजट प्राकृतिक खेती तथा जैविक खेती, कृषि शिक्षा, उद्यानिकी में बूंद-बूंद तथा फव्वारा सिंचाई पद्धति के महत्व, प्रदेश में फलों और फूलों के उत्पादन को प्रोत्साहन देने तथा केन्द्र सरकार द्वारा प्रस्तावित कृषि से जुड़े तीन अधिनियमों आदि विषयों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।

किसान पोर्टल से मिलेंगी ऑनलाइन सुविधाएं: सचिव कुंजीलाल मीणा ने बताया कि प्रदेश में जल्द ही राज किसान पोर्टल तैयार किया जाएगा। इस दौरान मंत्री लालचन्द कटारिया, प्रमोद जैन भाया, उदयलाल आंजना, सुखराम विश्नोई, टीकाराम जूली, भजनलाल जाटव सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे।
मुख्य सचिव राजीव स्वरूप सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे। विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से बैठक में उपस्थित रहे।