September 19, 2020

करोड़ों की संपत्ति पर राजघरानों की नजर

रामपुर के नवाबों की खानदानी संपत्ति पर चला 47 साल चला मुकदमा

रामपुर (उप्र), 9 जुलाई (एजेंसी)। रामपुर के नवाब खानदान की हजारों करोड़ रुपये की संपत्ति के बंटवारे पर सबकी नजर है। रामपुर के नवाब खानदान में अरबों रुपये की संपत्ति है। इसके बंटवारे को लेकर लंबे समय से मुकदमेबाजी चल रही थी। 47 साल चली मुकदमेबाजी के बाद पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने शरीयत के हिसाब से बंटवारा करने के आदेश दिए जबकि राजशाही परम्परा के मुताबिक राजा का बड़ा बेटा ही राजा बनता था और उसी के कब्जे में सारी संपत्ति रहती थी। अब कोर्ट के आदेश के बाद इसी तर्ज पर दूसरे राजघरानों की संपत्तियों के बंटवारे के मामले में स्थानीय अदालतें फैसले दे रही हैं। ं फरीदकोट व मेवाड़ के मामले में इसी तर्ज पर अदालत ने आदेश दिए हैं।

पौने दो सौ साल तक राज
आजादी से पहले पौने दो सौ साल तक रामपुर में नवाबों का राज रहा। तब राजघरानों के अपने नियम थे। रामपुर में आखिरी नवाब रजा अली खां की मौत के बाद उनके बड़े बेटे मुर्तजा अली खां संपत्ति पर काबिज हो गए। इसके विरोध में खानदान के दूसरे सदस्य कोर्ट चले गए। उनका कहना था कि जब राजशाही नहीं रही तो फिर बंटवारा राजशाही परम्परा के मुताबिक क्यों सुप्रीम कोर्ट ने उनकी बात को सही माना और जुलाई 2019 में शरीयत के हिसाब से बंटवारा करने के आदेश दिए। नवाब काजिम अली खां उर्फ नवेद मियां का कहना है कि रामपुर रियासत के बंटवारे में सुप्रीम कोर्ट का फैसला नजीर बन गया है। फरीदकोट और मेवाड़ के राजघरानों में भी अब रामपुर की तरह बंटवारा होगा। 30 जून को कोर्ट ने मेवाड़ राजवंश परिवार के बीच संपत्ति विवाद में फैसला सुनाया है। यह फैसला संयुक्त हिंदू परिवार की संपत्ति के दायरे में मानते हुए सुनाया गया। इसमें भी परिवार के सदस्यों के बीच तमाम संपत्ति का बंटवारा करने के आदेश दिए हैं।

हजारों करोड़ की है संपत्ति
नवाब खानदान के पास हजारों करोड़ की संपत्ति है। इसमें कोठी खासबाग,कोठी लक्खी बाग,कोठी बेनजीर बाग, नवाब रेलवे स्टेशन, सरकारी कुंडा आदि शामिल हैं। इनमें 1073 एकड़ जमीन है। करीब एक हजार हथियार भी हैं। इस संपत्ति का बंटवारा 16 हिस्सेदारों में किया जाएगा। इनमें नवाब रजा अली खां के तीन बेटे और छह बेटियां वारिसान शामिल हैं। कोर्ट ने शरीयत के हिसाब से ही सबके हिस्से भी तय कर दिए हैं। रामपुर के नवाब खानदान में अरबों रुपये की संपत्ति को लेकर लंबे समय से मुकदमेबाजी चल रही थी। 47 साल चली मुकदमेबाजी के बाद सुप्रीम कोर्ट ने शरीयत के हिसाब से बंटवारा करने के आदेश जारी कर दिए।