October 23, 2020

कागज के टुकड़े से कोरोना की जांच, मशहूर हुए भारतीय वैज्ञानिक

वाशिंगटन/नई दिल्ली, 8 अक्टूबर (एजेंसी)। भारत में वैज्ञानिकों की एक टीम ने एक मामूली कागज पर आधारित कोरोना वायरस परीक्षण प्रणाली को विकसित किया है जो गर्भावस्था के परीक्षण के समान तेजी से परिणाम देने में सक्षम है। मशहूर भारतीय जासूस क्रिस्पर के नाम पर बनी यह परीक्षण प्रणाली जीन-संपादन तकनीक पर आधारित है। वैज्ञानिकों ने इस फेलूदा किट भी कहा है। इस टेस्ट प्रणाली में मरीज की रिपोर्ट एक घंटे के अंदर आ जाएगी। इस टेस्ट की कीमत 500 रुपये है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी इस किट के लिए भारतीय वैज्ञानिकों की तारीफ की है। फेलूदा किट को प्रमुख भारतीय समूह टाटा द्वारा बनाया जाएगा और यह दुनिया का पहला पेपर-बेस्ड कोविड-19 टेस्ट होगा जो जल्द ही बाजारों में उपलब्ध होगा। दिल्ली स्थित सीएसआईआर- इंस्टीट्यूट ऑफ जीनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायोलॉजी में फेलुदा किट को विकसित किया गया है।

पीसीआर प्रणाली पर हैं निर्भर
देश में फिलहाल कोरोना की टेस्टिंग पीसीआर प्रणाली के जरिए हो रही है जिसमें टेस्टिंग के दौरान नाक के अंदर एक स्वेब डालकर कोरोना का परीक्षण किया जाता है। देशभर में अब 1,200 लैबों में लाखों लोगों के सैंपल की टेस्टिंग हो रही है। पीसीआर टेस्ट, पेपर-बेस्ड परीक्षण की तुलना में पांच गुना महंगा है। पीसीआर टेस्ट के लिए लोगों से 2,400 रुपये वसूले जा रहे हैं वहीं, पेपर-बेस्ड टेस्ट की कीमत सिर्फ 500 रुपये है। ग्लोबल हेल्थ एंड हेल्थ पॉलिसी के शोधकर्ता डॉक्टर अनंत भान का मानना है कि एंटिजन टेस्ट प्रणाली की जगह अब फेलूदा टेस्ट प्रणाली प्रभावी साबित हो सकती है क्योंकि यह बहुत सस्ती है और कोरोना टेस्ट के लिहाज से सटीक परिणाम देने में सक्षम है। नई टेस्टिंग प्रणाली में जांच के दौरान वायरस की तह तक पहुंचने में मदद मिलती है। इसमें कागज के टुकड़ों के जरिए कोरोना पॉजिटिव और नेगेटिव की रिपोर्ट आसानी से पता चल जाती है। टेस्टिंग के दौरान कागज पर दो नीली रेखाएं कोरोना पॉजिटिव होने का संदेश देती है जबकि एक नीली रेखा का मतलब कोरोना की नेगेटिव रिपोर्ट से है।