September 24, 2020

काव्य सुधा: बारिश का इंतजार

आस लगाए बैठा है कण-कण,
बिखरेंगे मोती निर्मल
बटोरने को सावन का धन,
फैला दिया है धरती ने आंचल
कोयल, मयूर, पपीहा,
सब में मच गई हलचल
तरू-गिरी पर होगी हरीतिमा,
घास हो जाएगी मलमल
हंस, दादुर, मीन,
नाच रहे हैं मचल-मचल
अमृत की होगी वर्षा,
मिट जाएगा सूखा गरल
हलधर के भीगे नयन,
फूटेगी अब नन्ही कोपल
टपक-टपक बरसेंगे मोती,
भर जाएंगे नदी, झील, तल
पिया से बिछोह में,
गौरी का ह्रदय हो गया था धवल
सावन में पिया मिलन से,
तन मन हो जाएगा श्यामल
देख कर सब का इंतजार
मेघ का मन हुआ विकल,
निकल पड़ा है जलधर,
पहनके साफा श्यामल