Tue. Jul 16th, 2019

काशी में कल से होगा देश का पहला अंतरराष्ट्रीय शास्त्रार्थ महाकुंभ

महाकुंभ में नेपाल, भूटान, इटली, मॉरीशस, म्यांमार समेत कई देशों के विद्वानों का होगा जमावड़ा

वाराणसी, 11 जुलाई (एजेंसी)। उत्तर प्रदेश के वाराणसी में तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय शास्त्रार्थ महाकुंभ 12 जुलाई से शुरू होने जा रहा है। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में होने वाले इस महाकुंभ में देश के विभिन्न प्रांतों के अलावा नेपाल, भूटान, इटली, मॉरीशस, म्यांमार समेत कई देशों के करीब 100 से अधिक विद्वान शिरकत करेंगे। सम्मेलन में युवा विद्वानों को आमंत्रित किया गया है। यह जानकारी कुलपति प्रो. राजाराम शुक्ल ने दी।
कुलपति शुक्ल ने देश में पहली बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शास्त्रार्थ सम्मेलन होने का दावा भी किया है। उन्होंने कहा कि इंडिक एकेडमी व भारतीय शिक्षण मंडल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सम्मेलन को चार भागों में बांटा गया है। वाक्यार्थ सभा, संगोष्ठी, अष्टावधान व मित्रविंदा श्रौतिष्टि। वाक्यार्थ सभा परंपरागत तरीके से परिसर स्थित शताब्दी भवन में तीन दिनों तक सुबह 7.30 बजे से रात दस बजे तक चलेगी। इस दौरान संस्कृत के विद्वान व्याकरण, न्याय, वैशेषिकम्भ, मीमांसा, वैदिक गणित, ज्योतिष, प्राचीन न्याय, योग, आयुर्वेद, द्वैत वेदांत, वेदांत सहित अन्य विषयों पर चर्चा-परिचर्चा करेंगे। वहीं युवाओं का शास्त्रार्थ वाग्देवी मंदिर प्रागंण में होगा। गुरुकुल परंपरा पर संगोष्ठी अष्टावधान में एक विद्वान से आठ लोग एक साथ सवाल करेंगे। सभी का जवाब विद्वान कविता व श्लोकों के माध्यम से देंगे। गुरुकुल परंपरा पर आधारित शिक्षा व्यवस्था को लेकर तीन दिवसीय संगोष्ठी का भी आयोजन होगा।

भूटान के राजगुरु भी होंगे शामिल
शास्त्रार्थ महाकुंभ में भूटान सरकार के राजगुरु स्वामी विवेकानंद सरस्वती, सर्वोच्च न्यायालय, नेपाल के रजिस्ट्रार राम कृष्ण तिमिलसिना, ब्रह्माश्री विश्वनाथ गोपाल कृष्ण शास्त्री, कविकुलगुरु कालिदास संस्कृत विवि (नागपुर) के कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी, पूर्व कुलपति प्रो. वी. कुटुम्ब शास्त्री, कर्नाटक के वेंकटेश कुलकर्णी, मद्रास के ब्रह्माश्री मणिशास्त्री द्रविड़, गोवा के देवदत्त गोविंद पाटील सहित अन्य लोग शामिल होंगे। कुलपति ने बताया कि महाकुंभ के दौरान राष्ट्र कल्याण के लिए अग्निहोत्रम यज्ञ कराया जा रहा है। इसके लिए तिरुपति से विद्वान आमंत्रित हैं।