September 21, 2020

किधर जाएगा घमासान

शीर्ष नेतृत्व ही तय करेगा कांग्रेस का भविष्य

दिनेश तिवाड़ी
नई दिल्ली, 25 अगस्त। कांग्रेस में अध्यक्ष पद को लेकर सामने आए लेटर बम की वजह से पार्टी में जबरदस्त घमासान मचा है। नए अध्यक्ष के चुनाव को लेकर इस बवाल की शुरुआत पार्टी की तरफ से कुछ वरिष्ठ सदस्यों ने ही की है। करने की भी अपील की है। वहीं राहुल गांधी पार्टी में छिड़े इस विवाद से काफी खफा दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने इस पत्र का समर्थन करने वालों पर भाजपा से सांठ-गांठ करने का आरोप लगाया। राहुल ने इस पत्र के टाइमिंग को गलत बताया है। उनका ये भी कहना है कि इस पत्र में जो मुद्दे उठाए गए हैं उन्हें मीडिया में नहीं बल्कि सही तरीके से सीडब्ल्यूसी में उठाया जाना चाहिए था। बहरहाल, पार्टी के लिए वर्तमान परिस्थिति काफी जटिल होती जा रही है। पार्टी के कई नेता राहुल गांधी को दोबारा अध्यक्ष बनाए जाने के पक्ष में हैं। प्रियंका गांधी कह चुकी हैं कि पार्टी का अध्यक्ष गांधी परिवार से अलग भी बनाया जा सकता है। ऐसे में पार्टी नेतृत्व को लेकर कई तरह के सवाल उभर कर सामने आते हैं।

पार्टी में कई अच्छे विचारक
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि पार्टी के अंदर कुछ नेता आज भी पार्टी में जान फूंकनेकी कोशिश में लगे हैं जो कि एक अच्छी बात है। उनका ये भी कहना है कि अध्यक्ष पद पर कौन बैठेगा इस बारे में कहना काफी मुश्किल है लेकिन पार्टी के अंदर कई ऐसे चेहरे और नाम हैं जो इसको नेतृत्व प्रदान कर सकते हैं। वे मानते हैं कि पार्टी के अंदर कई अच्छे विचारक है। वहीं देश में मौजूद विभिन्न दलों के बीच कांग्रेस अपनी अहम भूमिका निभाती रही है। विश्लेषकों का मानना है कि देश का एक तबका आज भी यही चाहता है कि कांग्रेस की वापसी हो लेकिन ये खुद पार्टी को ही तय करना होगा कि वो ऐसा करेगी या नहीं। 90 के दशक के बाद से दो बार पार्टी का नेतृत्व गांधी परिवार के बार गया है। एक बार इसका नेतृत्व सीतारात केसरी ने किया तो दूसरी बार नरसिंह राव ने इसका कुशल नेतृत्व किया था।

जड़ों से कटती चली
विश्लेषकों का कहना है कि बीते कुछ वर्र्षों से लगातार गिरता कांग्रेस का ग्राफ इस बात को बताता है कि वो अपनी जड़ों से कटती चली गई है। पहले टॉप टू बॉटम जो पार्टी की कार्यशैली रही थी वो खत्म हो गई है। बीते पांच से सात वर्षों के अंदर कांग्रेस में युवाओं की भागीदारी लगातार गिरी है। इसके लिए पार्टी दोबारा नए सिरे से अपनी पुरानी राजनीतिक जमीन वापस पाने के लिए निचले स्तर से काम करना होगा और अपनी पहचान को दोबारा बनाना होगा। युवाओं को दोबारा अपनी और लाने के लिए पार्टी के नेतृत्व की अहम भूमिका होगी। शीर्ष पर होने वाला बदलाव इसकी दिशा तय कर देगा।