December 3, 2020

केंद्र से हिस्सेदारी विवाद के चलते प्रोजेक्ट की गति धीमी

25 फीसदी काम भी नहीं हुआ

जयपुर, 2 नवम्बर। प्रदेश में जल जीवन मिशन का काम 25 फीसदी भी नहीं हो पाया है। पुरानी स्कीम व प्रोजेक्ट को इसमें शामिल करके कनेक्शन का आंकड़ा जोड़ा जा रहा है। मिशन में केंद्र व राज्य की हिस्सेदारी को लेकर चल रहे विवाद के कारण काम गति नहीं पकड़ पा रहा है। राज्य सरकार मिशन में पहाड़ी राज्यों के समान 90 फीसदी राशि केंद्र से मांग रही है। जबकि केंद्र अपना हिस्सा 50 फीसदी से ज्यादा करने पर राजी नहीं है। जल जीवन मिशन में केंद्र ने 2024 तक हर घर तक नल से पानी पहुंचाने का प्रावधान रखा है। हर घर तक नल प्रोजेक्ट में एक अनुमान के अनुसार एक लाख पचास हजार करोड़ का खर्च जाएगा। प्रदेश के हर गांव की ग्राम स्तरीय समितियों के जरिए ‘विलेज वाटर एंड सेनिटेशन प्लानÓ बनेगा ताकि हर गांव में पेयजल व सेनिटेशन का बेहतर सिस्टम बन सके। मिशन का नेशनल प्रोग्रेस 40 फीसदी से ज्यादा है तथा अधिकांश राज्यों में 60 फीसदी तक काम हो गया है। मिशन मॉनिटरिंग प्रमुख सचिव के अलावा चीफ इंजीनियर (ग्रामीण) आरके मीना कर रहे है। सीई आरके मीना पहले प्रोजेक्ट विंग में रहने के दौरान एसपीएमएल घूसकांड में विवादित रहे है। प्रदेश में जल जीवन मिशन में उदयपुर डिविजन में 1500 करोड़, भरतपुर संभाग में 1040 करोड़, बीकानेर संभाग में 980 करोड़, जयपुर प्रथम संभाग में 670 करोड़, जयपुर द्वितीय संभाग व अलवर में 80 करोड़ सहित अन्य काम होगा।