November 25, 2020

केदारनाथ से बड़ी आपदा का खतरा

सामने आई रिपोर्ट में खुलासा

नई दिल्ली, 11 नवम्बर (एजेंसी)। क्या हो अगर लद्दाख में जमी बर्फ की झीलें और ग्लेशियर पिघल जाएं? अगर ऐसा हुआ तो भारत के उत्तरी इलाकों में भयावह प्राकृतिक आपदा का मंजर देखने को मिल सकता है। यह केदारनाथ में आई आपदा से कई गुना ज्यादा भयावह हो सकती है। हाल ही में एक अध्ययन में यह खुलासा किया गया है कि जिस तरह से ग्लोबल वार्र्मिंग बढ़ रही है। इससे लद्दाख के ग्लेशियरों और बर्फ की झीलों को खतरा पैदा हो गया है।

आ सकती है बाढ़
लद्दाख दुनिया के सबसे ऊंचे इलाकों में से एक है. यहां पर टेंपरेचर बेहद कम रहता है. सर्दी के मौसम में पारा माइनस 16 तक चला जाता है। कुछ इलाकों में तो और भी नीच। यहां पर पानी जमकर बर्फ बन जाता है। हालांकि तेजी से बढ़ रहे तापमान की वजह से लद्दाख के ग्लेशियर पिघल रहे हैं। ठीक इसी तरह यहां पर मौजूद बर्फ की झीलें भी पिघल रही हैंष अगर झीलों में बर्फ पिघली तो हिमालय क्षेत्र में बाढ़ आ सकती है। साउथ एशिया इंस्टीट्यूट और हीडलबर्ग सेंटर फॉर द एनवॉयरमेंट ऑफ रुपर्टो कैरोला के रिसर्चर्स ने लद्दाख की एक बर्फीली झील के टूटने पर शोध किया। इसकी वजह से बाढ़ आई थी। जियोलॉजिस्ट प्रोफेसर मार्कस नुसरेर ने कहा कि हमनें लद्दाख के ग्लेशियरों पर रिसर्च करने के लिए सैटेलाइट इमेजेस का उपयोग किया। हमने इस अध्ययन के लिए 50 साल के समय अंतराल में लद्दाख की बर्फीली झीलों और ग्लेशियरों में आए बदलावों के आंकड़े जुटाए। प्रो. नुसरेर ने चेताया कि इन बर्फीली झीलों और ग्लेशियर के बर्फ अगर तेजी से पिघले तो हिमालय के निचले इलाकों में भयावह बाढ़ आ सकती है। भारत ऐसी भयानक बाढ़ केदारनाथ हादसे के दौरान झेल चुका है। ये ग्लेशियर और झीलें कभी फट सकते हैं। ऐसे में अचानक आने वाली बाढ़ से बचना बेहद मुश्किल हो जाएगा। इसलिए जरूरी है कि भारत समेत सभी एशियाई देश ग्लोबल वार्र्मिंग में कमी लाने का प्रयास करें।

अध्ययन से यह पता चलेगा
प्रोफेसर नुसरेर ने बताया कि हमारे अध्ययन से यह पता चलेगा कि भविष्य में ऐसे हादसों से कैसे बचा जाए या फिर ऐसी प्राकृतिक आपदाओं को कैसे टाला जाए। ग्लेशियरों के टूटने और झीलों के फटने से होने वाले बाढ़ को ग्लेशियल लेक आउटब्रस्ट फ्लड्स कहा जाता है। यह अध्ययन नेचुरल हैजार्डस नाम की साइंस मैगजीन में प्रकाशित हुआ है। सिर्फ भारत के लद्दाख क्षेत्र के ही ग्लेशियर नहीं पिघल रहे है। जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग के कारण दुनियाभर के ग्लेशियर पिघल रहे हैं। प्रो. नुसरेर की टीम ने अगस्त 2014 में लद्दाख में आई एक बर्फीली बाढ़ का अध्ययन किया। यह बाढ़ एक बर्फीली झील के फटने की वजह से आई थी. इसने सैकड़ों घरों, खेतों और पुलों को खत्म कर दिया था. ऐसा इसलिए हुआ था क्योंकि झील के फटने से थोड़ा पहले ही बारिश के मौसम में पानी की मात्रा बढ़ गई थी।

भविष्यवाणी नहीं की जा सकती
अगस्त 2014 में जिस बर्फीली झील के फटने की वजह से बाढ़ आई थी वह करीब 5300 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। इतनी ऊंचाई से जब पानी का तेज बहाव नीचे की ओर आएगा तो कितनी तबाही मचाएगा। इस तरह की घटना की कोई भविष्यवाणी नहीं की जा सकती।