October 23, 2020

कोरोनाकाल में संजीवनी से कम नहीं प्राणायाम

प्राणायाम पूरे शरीर पर असर दिखाता है। कोरोनाकाल में जो लोग पहले से कई बीमारियों से जूझ रहे हैं और नींद न आने की समस्या से परेशान हैं, उनके लिए प्राणायाम काफी फायदेमंद है। अलग-अलग संस्थानों ने प्राणायाम पर रिसर्च की है और उसके फायदे बताए हैं। जानिए प्राणायाम के 6 बड़े फायदा जिन पर वैज्ञानिकों ने भी मुहर लगाई।

रोज एक घंटा प्राणायाम, फेफड़े स्वस्थ
तमिलनाडु के विनायक मिशन मेडिकल कॉलेज की रिसर्च कहती है, 6 सप्ताह तक रोज एक घंटा योग करने से फेफड़ों की कार्यप्रणाली सुधरती है। यह अस्थमा, टीबी, के उपचार में सहायक है।

नशे से बाहर लाने में मददगार
स्प्रिंगर लिंक जर्नल में प्रकाशित शोध के अनुसार, जो लोग सिगरेट छोडऩा चाहते हैं उनके लिए यौगिक श्वसन और प्राणायाम बहुत फायदेमंद है। ये सिगरेट की तलब को कम करता है और इस आदत को छोडऩे में मदद करते हैं।

अच्छी नींद लाने में मदद
नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन की रिसर्च के मुताबिक, केवल 5 मिनट के भ्रामरी प्राणायाम से रक्त के दबाव और हृदय पर तुरंत असर पड़ता है। ऐसे ही 2019 में यूरोपियन रेसेपिरेटरी जनरल में प्रकाशित शोध में पाया कि इससे अच्छी नींद में सहायता मिलती है।

दिमाग पर सकारात्मक असर
जनरल ऑफ क्लीनिकल एंड डायग्नोस्टिक रिसर्च कहती है, धीमी और तेज गति से किए जाने वाले प्राणायाम से मस्तिष्क की कार्यप्रणाली में सुधार होता है। यह शोध 18-25 साल के 84 स्वस्थ युवाओं पर किया गया।

ब्लड प्रेशर कंट्रोल
यूएस नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन की रिसर्च के मुताबिक, हाई ब्लड प्रेशर के के हल्के लक्षण वाले रोगियों को दवा के साथ प्राणायाम का कराने से ब्लड प्रेशर में कमी आती है। यह रिसर्च में साबित भी हुआ है। केवल दवा लेने वाले रोगियों में इतना अंतर नहीं दिखा।

तनाव को करता है कम
इंटरनेशनल जर्नल ऑफ योग में प्रकाशित रिसर्च बताती है, प्राणायाम तनाव को कम करता है। शोध 90 लोगों पर किया गया। इसमें तनाव का स्तर, हृदय गति, फेफड़ों के सांस लेने की स्थिति, रक्त और धमनियों में पडऩे वाले दबाव को मापा गया।

अनुलोम विलोम प्राणायाम
सुखासन या पद्मासन में बैठें। अपने बाएं हाथ को बाएं घुटने पर रखें। तर्जनी और मध्यमा को दोनों भौहों के बीच में, अनामिका और छोटी उंगली को नाक के बाएं नासिका पर, और अंगूठे को दाहिनी नासिका पर रखें। अपने अंगूठे को दाईं नासिका पर रखकर धीरे से दबाकर, बाईं नासिका से सांस लें। अब बाईं नासिका को अनामिका और छोटी उंगली के साथ धीरे से दबाएं। दाहिने अंगूठे को दाईं नासिका से खोलकर दाईं नासिका से सांस बाहर निकालें। फिर दाईं नासिका से सांस लीजिए और बाई ओर से सांस छोडिए। इस तरह नाड़ी शोधन प्राणायाम का एक दौर पूरा हुआ। इस तरह बारी-बारी से दोनों नासिका के माध्यम से सांस लेते हुए 3 से 5 राउंड पूरे करें।

फायदे- अनुलोम विलोम प्राणायाम को नियमित तौर पर करने से फेफड़े मजबूत बनते हैं, एलर्जी की समस्या और सायनस की दिक्कत दूर होती है। शरीर में रक्त का संचार सुधरता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। यह ब्लड प्रेशर की समस्या को दूर करने में सहायक है। मधुमेह जैसी समस्याएं खत्म हो जाती हैं।

सावधानी- हर सांस छोडऩे के बाद उसी नासिका से सांस भरे जिस नासिका से सांस छोड़ी हो। अपनी आंखें पूरी तरह बंद रखें और किसी भी दबाव या प्रयास के बिना लंबी, गहरी और आरामदायक सांस लेना जारी रखें।

भ्रामरी प्राणायाम
सबसे पहले सुखासन, पद्मासन या सिद्धासन किसी भी एक आसन में बैठ जाएं। अब हल्की सांस अंदर लें। तर्जनी अंगुली से अपने कानों को बंद कर लें। अब एक लम्बी गहरी सांस लें और सांस को छोड़ते हुए तेज स्वर में भिनभिनाने की आवाज निकालें (जैसे मधुमक्खी की आवाज आती है)। इस दौरान मन को शांत रखें। यह पूरा एक चक्र हुआ। इस प्रकार 5 से 10 चक्र पूरा करें।

सावधानी- यदि कान में दर्द या संक्रमण हो तो इस प्राणायाम को नहीं करना चाहिए। भिनभिनाने वाली आवाज निकालते हुए अपने मुंह को बंद रखें। प्राणायाम करते समय अपने चेहरे पर दबाव न डालें और अपने मन को शांत रखें।

फायदे – सभी प्रकार के मानसिक रोग जैसे तनाव, क्रोध, चिड़चड़ापन आदि दोष दूर होते हैं। इससे मन शांत और प्रसन्न रहता है। हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, माइग्रेन आदि रोगों में लाभ मिलता है। मन को एकाग्र करने एवं आत्मविश्वास को बढ़ाने में यह प्राणायाम लाभकारी है। अनिद्रा रोग से छुटकारा मिलता है।