September 23, 2020

खजाने की क्यों बिगड़ी सेहत?

सांध्य ज्योति संवाददाता
जयपुर, 7 सितम्बर। कोरोना के कारण कमजोर आर्थिक हालात से गुजर रही अशोक गहलोत सरकार ने अब रिवर्स गियर लगाया है। पेट्रोल और शराब जैसी चीजों पर सरचार्ज और टैक्स में बढ़ोतरी कर सरकारी खजाना भरने की कोशिश करके थकी सरकार ने अब कटौती पर जोर दिया है। इसके तहत एक बार फिर से मंत्रिमंडल से लेकर अधिकारियों,कर्मचारियों के वेतन में कटौती की जायेगी, वहीं सरकारी खर्चों पर पांबदियां लगा दी गई है।

इसलिए बिगड़ी खजाने की सेहत
राजस्थान की मौजूदा सरकार जब से सत्ता में आई है तब से खराब आर्थिक स्थिति की बात कर रही है। सरकार के बही खाते की बात करें तो इस वर्ष मार्च में समाप्त वित्तीय वर्ष में सरकार अपने बजट अनुमानों की 95.60 प्रतिशत ही आय हासिल कर पाई है जो कि इससे पिछले वित्तीय वर्ष के मुकाबले दो प्रतिशत कम है। वहीं प्रदेश की खस्ता आर्थिक स्थिति के बीच किसानों की कर्जमाफी और बेरोजगारी भत्ते जैसी बड़ी चुनावी घोषणाओं के दबाव के चलते सरकारी खजाने की सेहत बिगड़ती चली गई।

केंद्र को बताया जिम्मेदार
मुख़्यमंत्री अशोक गहलोत का कहना है कि हमारी राशि में कटौती की जा रही है। केंद्र सरकार ने वर्ष 2019-20 के अंतरिम बजट में राज्य को केंद्रीय करों में हिस्से के रूप में 46 हजार 411 करोड़ आठ लाख रुपये देने का अनुमान किया था। उसे बजट अनुमानों में घटाकर 44 हजार 461 करोड़ 86 लाख रुपये कर दिया गया। इसके बाद संशोधित अनुमानों में इसे और कम करते हुए 36 हजार 49 करोड़ 14 लाख रुपये कर दिया गया। केंद्रीय करों में 10 हजार 361 करोड़ 94 लाख रुपये की कटौती की गई है। कोरोना ने राज्य को और गहरे संकट में डाल दिया। राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2020-21 में शराब से साढ़े बारह हजार करोड़ की आमदनी का लक्ष्य रखा है। आबकारी अधिकारियों के सामने अब समस्या यह है कि सरकार के टारगेट को किस तरह पूरा किया जाए। पेट्रोल- डीजल पर वेट बढ़ाने से भी कोई ज्यादा फायदा सरकार को नहीं हुआ। लॉकडाउन में दोनों ही प्रयास फेल हो गए। केंद्र ने कोई सहायता पैकेज नहीं दिया।