September 27, 2020

खुद को बार-बार बदल रहा है कोरोना वायरस

  • ऐसे में कैसे बन पाएगी वैक्सीन
  • टेंशन में एक्सपर्ट

नई दिल्ली, 3 सितम्बर (एजेंसी)। भारत में कोरोना वायरस का संक्रमण तेजी से फैलता जा रहा है। इस बीच अब सबकी निगाहें हैं कोरोना वैक्सीन पर। वैक्सीन के ही आने से लोगों की जिंदगी वापिस से पटरी पर दौड़ेगी। लेकिन एक नई स्टडी में विशेषज्ञों ने इस वायरस के बदलते स्वरुप को पाया है। ये बहुत ही चिंता का विषय है। अगर ये वायरस बार-बार अपना स्वभाव बदलता रहा तो वैक्सीन के असर में भी फर्क आ जाएगा और संभव तो ये भी है कि वैक्सीन भी इसके संक्रमण को रोक न सके।

कई बार इसके प्रोटीन में बदलाव
एक मेडिकल जर्नल में प्रकाशित अध्ययन से पता चला है कि सार्स-2 वायरस कोविड-19 का कारण बनता है। इसके स्पाइक प्रोटीन में कई परिवर्तन हुए हैं। यही प्रोटीन हैं जो वायरस को मानव कोशिकाओं में घुसपैठ करने की क्षमता देता है। एकबार जब यह शरीर के अंदर प्रवेश कर लेता है तो ये वहां संक्रमण फैलना शुरू कर देता है, जिससे तमाम तरह की दिक्कतें पैदा होने लगती हैं। जर्नल ऑफ लेबोरेटरी फिजिशियन की इस रिपोर्ट में 1,325 जीनोम, 1,604 स्पाइक प्रोटीन और 279 आंशिक स्पाइक प्रोटीन के विश्लेषण पर आधारित था। इन जांच नमूनों को 1 मई तक अमेरिका के नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इन्फॉर्मेशन में रखा गया और वहीं पर इसपर रिसर्च किया गया। अध्ययन के प्रमुख लेखक डॉ सरमन सिंह ने कहा कि उन्हें स्पाइक प्रोटीन में 12 म्यूटेशन मिले। जिनमें से छह नॉवेल म्यूटेशन थे। संक्रमण में भी आनुवांशिक परिवर्तन पाया गया है। उन्होंने कहा कि हम नहीं जानते कि यह रोग के विषाणु को कैसे प्रभावित करेगा। विशेषज्ञों ने कहा कि अमेरिका से सार्स-2 के जीनोम से निकाले गए स्पाइक प्रोटीन में अधिकतम आनुवंशिक परिवर्तन देखा गया। सिंह ने कहा, वायरस अलग-अलग वातावरण के संपर्क में आने पर अपनी आनुवंशिक संरचना को बदलने या बदलने के लिए जाना जाता है।