September 27, 2020

खूब फल-फूल रहा है छौना

  • हिरन के बच्चे की मां बना केयरटेकर
  • बेहतर देखभाल से बचाई जान

सांध्य ज्योति संवाददाता
जयपुर, 2 सितम्बर। पिंक सिटी जयपुर के नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क से एक दिलचस्प और जज़्बाती स्टोरी सामने आई है। यह कहानी सिका डियर के 15 दिन के बच्चे और उसके केयरटेकर भंवर की है। पार्क में पिछले पांच साल में इससे पहले भी चार बार सिका डियर के बच्चे हुए, लेकिन ऐसा पहली बार हुआ जब हिरन मां के ठुकराने के बाद भी 15 दिन तक न सिर्फ ये हिरण का छौना (बच्चा) जिंदा है बल्कि खूब अच्छे से फल-फूल खा रहा है। दरअसल सिका डियर दुर्लभ प्रजाति के हिरण है। आम तौर पर यह जापान में और नार्थ ईस्ट के कुछ देशों में पाए जाते हैं। भारत में खासकर राजस्थान जैसे प्रदेश के लिए सिका हिरण बहुत दुर्लभ हैं। काफी वक्त से जयपुर के नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में सिका डियर लाकर रखे गए हैं लेकिन इनकी सक्सेसफुल ब्रीडिंग के बावजूद इनके बच्चे जिंदा नहीं रहते। नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में वर्ष 2016 से अब तक पांच बार दुर्लभ सिका हिरण का प्रजनन हो चुका है, लेकिन हर बार मादा बच्चे के पैदा होते ही एक बार दूध पिला कर उसे फिर दूध पिलाना बंद कर देती है और दुत्कार कर अलग कर देती है।
इसका नतीजा यह होता है कि आज तक सिका डियर का कोई भी बच्चा तीन दिन से ज्यादा समय तक जिंदा नहीं रह पाता लेकिन इस बार सिका डियर का बच्चा होने पर कुछ अलग ही नजारा है। सब हैरान हैं कि एक महीने होने के बाद भी बच्चा जिंदा कैसे है। दरअसल केयरटेकर भंवर सिंह राठौड़ आमला की मेहनत और देखभाल की वजह से सिका हिरण का यह बच्चा अभी तक जीवित है और सही-सलामत है। इस बार भी हिरण की मां ने हमेशा की तरह बच्चे को जन्म देने के बाद उसे दुत्कार दिया था। लेकिन भंवर सिंह ने बच्चे को उसकी किस्मत के भरोसे नहीं छोड़ा, बल्कि इसे अपने पास रख लिया। केयरटेकर भंवर सिंह चौबीसों घंटे हिरण के नन्हें बच्चे को अपने पास रखते हैं। वो इसे हर तीन घंटे में दूध पिलाते हैं, सुबह साथ में जंगल की सैर कराते हैं, मालिश भी करते हैं। हिरण का बच्चा भंवर के साथ ही उनके सर्वेंट रूम में सोता है और भूख लगने पर रात में कभी भी सोए हुए भंवर को उठा देता है। इस कड़ी मेहनत और लगाव का नतीजा है कि 15 दिन बाद भी सिका डियर का यह बच्चा न सिर्फ जिंदा है बल्कि काफी तंदुरुस्त भी है।
भवंर सिंह राठौर ने प्यार से हिरण के बच्चे का नाम टेमी रखा है और यह नाम भी खुद हिरण के बच्चे का पसंद किया हुआ है। पहले भंवर ने उसे कई नामों से पुकारा लेकिन बच्चे ने जवाब नहीं दिया लेकिन टेमी नाम उसे ऐसा पसंद आया कि वो आवाज लगते ही भंवर के पीछे दौड़ा चला आता है।