October 28, 2020

गांधी का जीवन दर्शन विश्व शांति के लिए आज भी प्रासंगिक : कल्ला

जयपुर, 3 अक्टूबर। अन्तरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के अवसर पर शान्ति, सद्भाव- अहिंसा विषय पर आयोजित वैश्विक ई-सम्मेलन का आयोजन किया गया। इसमें दुनियाभर में अलग-अलग देशों से गांधी दर्शन से जुड़े विशिष्ट प्रतिभागियों ने भी अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कला एवं संस्कृति मंत्री डॉ. बीडी कल्ला ने अपने संबोधन में कहा कि महात्मा गांधी ने अपने जीवन में सत्य को सर्वाधिक महत्व दिया। वे कहते थे कि सत्य ईश्वर है और अहिंसा उसे पाने का माध्यम। कल्ला ने कहा कि पूरा विश्व बारूद के ढ़ेर पर बैठा है और कहीं एक छोटी सी चिंगारी भी भयावह परिणाम सामने ला सकती है। उन्होंने कहा कि ऐसे नाजुक दौर में गांधी का जीवन दर्शन विश्व शांति और मानवता की स्थापना के लिए आज भी प्रासंगिक है। उन्होंने कहा कि गांधी के वसुधैव कुटुम्बकम का संदेश इस पूरे विश्व को एक सूत्र में बांध सकता है।
ई-सम्मेलन में लन्दन से सतीश कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि गांधी जी ने केवल दूसरों के प्रति अहिंसा की बात नहीं की उनके जीवन से हमें यह भी संदेश मिलता है कि हमें खुद के प्रति भी अहिंसा छोडऩी होगी। हमें अपने प्रति भी दयालु होना होगा। हमें अहंकार से खुद को मुक्त कर प्यार से खुद को भरना होगा।
कार्यक्रम में ज्यां लुई बातो फ्रांस से जुड़े। उन्होंने कहा कि अहिंसा जीवन जीने का एक सम्पूर्ण तरीका है और आने वाली पीढ़ी को यह मार्ग दिखाना सबसे ज्यादा जरूरी है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक स्रोतों के उपयोग के लिए पूरे विश्व में संघर्ष है। गांधी का जीवन हमें यही सिखाता है कि कम से कम चीजों में अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति की जाए। यूरोप की सोनिया डियोटो ने कहा कि गांधी जी का जीवन शांति और अहिंसा की मिसाल बन कर दुनिया के सामने है। उन्होंने कहा कि गांधी ने हमें सिखाया कि हम उन सबके प्रति समभाव और सम्मान रखें, जो धार्मिक, सामाजिक या अन्य किसी भी तरह से हमसे अलग हैं। इस मंच का संचालन कला एवं संस्कृति विभाग की शासन सचिव श्रीमती मुग्धा सिन्हा तथा ज्योति जोशी ने किया। इस अवसर पर मुख्य सचिव राजीव स्वरूप, प्रमुख शासन सचिव, मुख्यमंत्री कुलदीप रांका एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे।