September 21, 2020

गायों के कोटे का पैसा गायों पर ही खर्च हो

स्टाम्प संशोधन अधिनियम को लेकर संतों में आक्रोश, आंदोलन की दी चेतावनी

सांध्य ज्योति संवाददाता
जयपुर, 9 सितम्बर। स्टाम्प संशोधन अधिनियम को लेकर विश्वहिंदू परिषद और गौशाला संचालकों में आक्रोश है। विहिप और संतों का आरोप है कि अधिनियम संशोधन के बाद सरकार गायों के संरक्षण और संवर्द्धन पर खर्च होने वाले पैसे को दूसरे कार्यो में खर्च कर सकती है। संशोधन वापस लेने के लिए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और राज्यपाल कलराज मिश्र को ज्ञापन दिया गया है। मांग नहीं मानने पर जनआंदोलन करने की चेतावनी दी है। राज्य सरकार ने वर्ष 2016 में राजस्थान स्टाम्प अधिनियम 1988 में संशोधन कर स्टाम्प ड्यूटी में दस प्रतिशत का अधिभार लगाया था। इस अधिभार से मिलने वाली राशि को गौवंश संरक्षण और संवर्धन पर खर्च करने का प्रावधान किया था। इधर, वर्तमान सरकार ने मई 2020 में इस एक्ट में फिर संशोधन कर अधिभार से मिलने वाली राशि का उपयोग सूखा, बाढ़, महामारी, अग्नि जैसी प्राकृतिक और मानव निर्मित आपदाओं में खर्च करने का प्रावधान जोड़ा है। इस पर विश्व हिंदू परिषद के क्षेत्र मंत्री सुरेश उपाध्याय और संत हरिशंकर दास वेदांती ने विरोध जतायाहै। उपाध्याय ने कहा कि गाय का निवाला छीनकर आपदा प्रबंधन में लगाना ठीक नही है। पिछली सरकार ने गौवंश संरक्षण के लिए राशि की व्यवस्था की थी। स्टाम्प से होने वाली आय से 2016 से गायों और गौशालाओं को अब तक काफी राहत थी। वर्तमान सरकार ने अन्य कारणों में खर्च के लिए नियम बना दिया। उपाध्याय ने कहा कि गौशालाओं को अनुदान प्राप्त करने के लिए अब नेताओं-अधिकारियों पर निर्भर रहना होगा। नेता जिसे चाहेंगे उसे अनुदान मिलेगा। प्रदेश में अभी साढ़े तीन हजार गौशाला रजिस्टर्ड है। करीब 1900 गौशालाओं को राशि मिलती है। सभी छोटी बड़ी गौशालाओ को सहयोग राशि मिले। अभी 180 दिन ही गायों को अनुदान मिलता है, सरकार इसे बढ़ाकर 300 दिन गौशालाओं को अनुदान दें। हरिशंकर दास महाराज ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गाय को गौमाता के रूप में देखा जाता है। गायों के कोटे के पैसा गायों पर ही खर्च किया जाना चाहिए। सरकार गोचर की भूमि को संरक्षित करें। सरकार ने हमारी मांग नहीं मानी तो जनआंदोलन खड़ा किया जाएगा। प्रदेश भर में 500 स्थानों पर ज्ञापन दिए गए हैं। अब संत समाज के निर्देशन में आगामी रणनीति बनाई जाएगी।