Fri. Jul 3rd, 2020

गुरु को शत-शत प्रणाम…

गुरु रूपी रवि ने देकर ज्ञान,
चमका दिया फलक पर शशि समान।
गुरु को शत-शत प्रणाम।

ठूंठ सा था अज्ञानी जीवन,
ज्ञान के नीर से कर दिया नूतन।
गुरु को शत-शत नमन।

पाषाण सा था चंचल मन,
तराश कर बना दिया विग्रह अनंत।
गुरु को शत-शत नमन।

अज्ञानता के कड़वे फल करता था सेवन,

ज्ञान का मीठे रस मिलाकर सफल किया जीवन।
गुरु को शत-शत नमन।
अज्ञान के तिमिर का कर के भंजन ,
नेत्रों में भर दिया ज्ञान का अंजन,
गुरु को शत-शत नमन।

अज्ञान के पंक में था जोक समान,
बना दिया कमल देकर विद्या दान।
गुरु को शत-शत प्रणाम।

गुरु की महिमा का क्या करूं बखान ,
अनुपम अविनाशी है गुरु ज्ञान ,
गुरु को शत-शत प्रणाम।

हे प्रभु !मुझे दो बस यह वरदान,
सदा गुरु चरणों में लगे मेरा ध्यान।
गुरु को शत-शत प्रणाम।