October 27, 2020

गेहूं, मटर, चना और लहसुन की अगेती खेती के लिए बोएं ये किस्में

किसान धान की कटाई के बाद रबी फसलों की बुवाई में जुट गए हैं। रबी सीजन में हिमाचल प्रदेश के अधिकतर किसान गेहूं, मटर, चना और लहसुन की खेती करते हैं। ऐसे में के अलावा दी है। ऐसे में कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर के कृषि एवं पशुपालन वैज्ञानिकों ने किसानों को एक जरूरी सलाह दी है। कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि किसानों को अक्टूबर के पहले पखवाड़े में गेहूं की अगेती किस्मों की बुवाई करना चाहिए। बता दें कि गेहूं की अगेती किस्मों में 3 किस्मों की बुवाई करने की सलाह दी है।

चना बीज उपचार
चना बीज उपचारित करने के लिए बैविस्टिन, ढाई ग्राम प्रति किलोग्राम बीज का प्रयोग करें। इसके अलावा वीटावैक्स 2 ग्राम प्रति किलोग्राम या रैक्सिल 1 ग्राम प्रति किलोग्राम से बीज उपचारित करें। ध्यान रहे कि गेहूं की अगेती किस्मों की बुवाई करने के लिए एक हेक्टेयर में लगभग 100 किलोग्राम बीज डालें। चने की खेती करने के लिए जल निकास की अच्छी व्यवस्था होनी चाहिए। इसके साथ ही दोमट और रेतीली भूमि उपयुक्त मानी जाती है। इसकी खेती के लिए जमीन थोड़ी भिकड़ों ली होनी चाहिए, ताकि जड़ों में हवा का अच्छी तरह प्रवेश हो सके। ध्यान रहे कि बीज को 10 से 12.5 सेंटीमीटर गहरा डालें, क्योंकि कम गहरी पर बुवाई करने पर उखेड़ा रोग लग जाता है। अगर किसान जीपीएफ-2, हिमाचल चना-2, हिमाचल चना-1 और पालम चना-1 किस्मों की बुवाई करते हैं, तो कतारों की दूरी 30 टीमीटर की दूरी होनी चाहिए। इसके अलावा एचपीजी-17 किस्मों की बुवाई करने के लिए कतारों में 50 सेंटीमीटर की दूरी होनी चाहिए।

चने की अगेती किस्में

  • चना-1
  • हिमाचल चना-2
  • जीपीएफ-2
  • डीकेजी-986
  • पालम चना-1
  • एचपीजी-17

मटर की अगेती किस्में
अगेती किस्मों की बुवाई करने के लिए किसान पालम, त्रिलोकी, अरकल और वीएल-7 आदि किस्मों का चुनाव कर सकते हैं।

लहसुन की अगेती किस्में
लहसुन की सुधरी किस्मों जैसे जीएचसी-1, एग्रीफॉउफड पार्वती आदि किस्मों की बुवाई कर सकते हैं।