October 20, 2020

गैस चैंबर बन सकती है दिल्ली

सांस के रोगियों के लिए काल बन सकता है कोरोना

नई दिल्ली, 6 अक्टूबर (एजेंसी)। कोरोना महामारी के बीच प्रदूषण एक बड़ी समस्या के रूप में दस्तक दे रहा है। लॉकडाउन के बाद प्रदूषण घट गया था। आबोहवा साफ हो गई थी। देश में कोरोना से मृत्यु दर कम रही लेकिन एक बार फिर प्रदूषण बढऩे लगा है। इस वजह से पहले वाली स्थिति वापस होने लगी है। जानकारों के अनुसार इसका कारण यह है कि सड़कों पर भारी संख्या में वाहन उतरने लगे हैं। अब पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने से प्रदूषण और बढ़ेगा। तापमान जैसे-जैसे नीचे गिरेगा, वैसे-वैसे धुआं व धूलकण वातावरण में बहुत ऊपर जाने के बजाय नीचे एकत्रित होना शुरू करेंगे। इस वजह से गैस चैंबर की स्थिति बन जाती है। ऐसी स्थिति में कोरोना श्वसन रोगियों के लिए काल सरीखा बन सकता है। कोरोना फेफड़े पर ही अटैक करता है।  दीपावली में यदि पटाखे जलेगें तो उसका धुआं भी कोरोना संक्रमित मरीजों के फेफड़े में जाएगा। इस वजह से कोरोना संक्रमितों की हालत बिगड़ सकती है।  वैसे भी प्रदूषण के कारण सांस की बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। पिछले साल मेडिकल जर्नल लैंसेट में प्रकाशित एक अध्ययन के मुताबिक तीन दशक में सांस की बीमारी सीओपीडी (क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज) से पीडि़त मरीजों की संख्या देश में करीब दोगुनी हो गई है। अस्थमा के मरीज भी बढ़े हैं। रिपोर्ट के मुताबिक सांस की बीमारियों से पीडि़त 32 फीसद मरीज भारत में हैं। देश में करीब 4.2 फीसद लोग सीओपीडी व 2.9 फीसद लोग अस्थमा से पीडि़त हैं। इसका सबसे बड़ा कारण प्रदूषण को माना गया है। प्रदूषण के कारण कम उम्र के लोगों में भी फेफड़े का कैंसर देखा जा रहा है। हार्ट अटैक व स्ट्रोक का भी एक बड़ा कारण प्रदूषण है। लिहाजा, कोरोना के इस दौर में प्रदूषण बढऩा ज्यादा जोखिम भरा साबित हो सकता है।