September 22, 2020

चिरनिद्रा में प्रणव दा

  • आज अंतिम संस्कार
  • सात दिन का शोक घोषित

नई दिल्ली, 1 सितम्बर (एजेंसी)। पांच दशक की दलीय राजनीति के बाद राष्ट्रपति के रूप में देश को नई दिशा देने वाले भारत रत्न प्रणब मुखर्जी का सोमवार को दिल्ली के सैन्य अस्पताल में निधन हो गया। 84 वर्षीय प्रणब 10 अगस्त से अस्पताल में भर्ती थे। सबसे पहले उनके पुत्र अभिजीत मुखर्जी ने ट्वीट कर उनके निधन की जानकारी दी। प्रणब का पार्थिव शरीर आज दिन में 11 बजे से 12 बजे तक उनके आवास 10 राजाजी मार्ग पर लोगों के दर्शन के लिए रखा जाएगा। दोपहर दो ढाई बजे लोधी रोड स्थित शवदाह गृह में अंतिम संस्कार किया जाएगा।

विशाल शख्सियत
प्रणब की विशाल शख्सियत का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि जुलाई, 2012 में राष्ट्रपति पद पर आसीन होने से पहले वह रक्षा व वित्त जैसे अहम मंत्रालय संभाल चुके थे। उन्हें 10 अगस्त को दोपहर में दिल्ली कैंट स्थित आरआर (रिसर्च एंड रेफरल) अस्पताल में भर्ती किया गया था। उनके मस्तिष्क में खून का थक्का जम गया था, जिसकी सर्जरी हुई थी। उसी दिन जांच में कोरोना संक्रमित भी पाए गए। ऑपरेशन के बाद सेहत में सुधार नहीं हुआ। वह कोमा में थे और उनके फेफड़े व किडनी में संक्रमण हो गया था। उन्हें वेंटीलेटर सपोर्ट देना पड़ा था।

पांच दशक तक अपनी क्षमता का लोहा मनवाया
सोमवार शाम 4.30 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। राष्ट्र्रीय राजनीति में पांच दशक तक अपनी क्षमता का लोहा मनवाने वाले प्रणब मुखर्जी भारत के 13वें राष्ट्रपति थे। केंद्र सरकार ने उनके सम्मान में सात दिन का शोक घोषित किया है। विलक्षण राजनीतिक प्रतिभा के कारण उन्हें चाणक्य, संकटमोचक जैसे कई विशेषण दिए जाते रहे हैं। 2019 में उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया था। प्रणब के निधन पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, पीएम मोदी, अमित शाह, राहुल गांधी समेत कई नेताओं ने शोक व्यक्त किया। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने शोक जताते हुए कहा कि प्रणब मुखर्जी के निधन से एक युग का अंत हो गया। उनका सार्वजनिक जीवन महान था। उन्होंने एक संत की तरह भारत माता की सेवा की। राष्ट्र को अपना मूल्यवान बेटा खोने का दुख है। प्रणब मुखर्जी की मौत पर शोक जताते हुए पीएम मोदी ने कहा कि अपने राजनीतिक सफर में प्रणब दा ने कई अहम मंत्रालय संभाले। वह दिग्गज राजनेता और प्रखर विद्वान थे। 2014 में मैं दिल्ली में नया था। पहले दिन से ही मुझे प्रणब दा का सहयोग एवं आशीर्वाद मिला। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा कि प्रणब दा कांग्रेस का इस तरह हिस्सा रहे कि यह सोचना मुश्किल है कि उनके ज्ञान, अनुभव, सुझाव एवं समझ के बिना हम कैसे चलेंगे। मैंने उनसे बहुत कुछ सीखा।

  • तुमि कि बोले दिले…और बन गए थे राष्ट्रपति

जब प्रणब ने अगले जन्म में राष्ट्रपति भवन का घोड़ा बनने की जताई थी इच्छा

कोलकाता, 1 सितम्बर (एजेंसी)। भारत रत्न पूर्व राष्ट्र्रपति प्रणब मुखर्जी हमारे में बीच नहीं हैं। परंतु, उनसे जुड़ी एक वाकया आज भी उनके करीबियों के जेहन में जिंदा है। जब वे पहली बार राज्यसभा का सदस्य बन दिल्ली पहुंचे थे तो उन्होंने राष्ट्रपति की अजीम-ओ-शान में चार चांद लगाने वाली घुड़सवारों की टुकड़ी का मामूली हिस्सा बनने की इच्छा जताई थी, वह भी अगले जन्म में घोड़ा बनकर… लेकिन ऊपर वाले की कृपा और किस्मत ने उन्हें इसी जन्म में देश का प्रथम नागरिक यानी राष्ट्रपति बना दिया था। सुदूर बंगाल के गांव में पैदा हुए प्रणब राष्ट्र्रपति भवन के घोड़ों के ठाठ-बाट से ही प्रभावित हो गए थे। मजाक में सही अपनी इच्छा उन्होंने अपनी बहन अन्नपूर्णा बनर्जी से व्यक्त की थी।
प्रणब का अपनी बहन अन्नपूर्णा बनर्जी के साथ काफी लगाव था। हर वर्ष वह दुर्गा पूजा में गांव पहुंचते तो अपनी बहन अन्नपूर्णा के यहां अवश्य जाते थे। घोड़ा बनने की इच्छा वाली बात उनकी बहन ने ही बताई थी। 1969-70 में प्रणब दा पहली बार राज्यसभा सदस्य बने थे। तब उन्हें सांसद कोटे से साउथ एवेन्यू में फ्लैट मिला था। उनके फ्लैट से रायसीना हिल्स (राष्ट्रपति भवन) का अस्तबल और घोड़े दिखाई देते थे। वहां घोड़ों की खूब खातिरदारी होती थी। उसी समय भाई से मिलने व दिल्ली घूमने के लिए अन्नपूर्णा वहां गई थीं। एक दिन दोनों भाई-बहन अपने फ्लैट में बैठकर राष्ट्रपति भवन देख रहे थे। उसी दौरान मजाक में प्रणब उर्फ पोल्टू ने बहन से कहा अगले जन्म में वह राष्ट्रपति का घोड़ा बनेंगे। इस पर अन्नपूर्णा ने कहा कि घोड़ा क्यों, इसी जन्म में तुम राष्ट्र्रपति बनोगे। इस पर प्रणब ने कहा, तुमि कि बोले दिले (तुमने क्या बोल दिया)। जबसे वह बीमार थे, गांव में उनके स्वस्थ्य होने के लिए कई दिनों तक यज्ञ किया गया था।