September 25, 2020

चि_ी कांड के बाद कांग्रेस के कुछ युवा नेताओं की बढ़ी मुश्किलें

दिनेश तिवारी
नई दिल्ली, 5 सितम्बर। इन दिनों कांग्रेस के कई सांसदों को पार्टी में भविष्य उज्जवल नहीं लग रहा है। इन सब का कहना है कि इनके लिए पार्टी छोडऩा मुश्किल है और उससे भी ज्यादा मुश्किल है बीजेपी में शामिल होना। इसके अलावा इनके मन में कोई और विकल्प फिलहाल नहीं है।

कांग्रेस नेताओं की मुश्किलें
कई नेताओं ने मीडिया सेे बातचीत की लेकिन वो सामने आकर कुछ भी नहीं कहना चाहते हैं। कई नेताओं का कहना है कि पीएम मोदी की लोकप्रियता के चलते इनके लिए लोकसभा के अगले चुनाव में जीतना मुश्किल चुनौती होगी। इन सबका कहना है कि 2024 लोकसभा चुनाव तक हालात बदल सकते हैं। अयोध्या में तब तक राम मंदिर का निर्माण हो जाएगा। इसके अलावा अगले चार सालों में देश की इकोनॉमी भी पटरी पर लौट सकती है। साथ ही कई और चीजें बेहतर हो सकती हैं। यानी कांग्रेस को जनता के बीच मुद्दों को भुनाने का मौका नहीं मिलेगा।

मुश्किल में जितिन प्रसाद
जितिन प्रसाद कभी गांधी परिवार के पसंदीदा नेता थे लेकिन अब तस्वीर बदल गई है। जिन 23 असंतुष्ट नेताओं ने चि_ी लिखी थी उनमें प्रसाद का भी नाम था। प्रसाद की नजर अब ब्राह्मण समाज के 12 प्रतिशत वोट पर है। इसके लिए उन्होंने ब्राह्मण समाज परिधान की शुरुआत की है। जितिन प्रसाद की गांधी परिवार से तकरार उस वक्त बढ़ी जब उन्होंने लखनऊ से चुनाव लडऩे से मना कर दिया। प्रियंका गांधी चाहती थीं कि वो वहां से चुनाव लड़ें। कांग्रेस में प्रसाद का भविष्य अंधेरे में दिख रहा है। आराधना मिश्रा और अजय कुमार लल्लू जैसे नए नेता रेस में उनसे आगे चल रहे हैं। बसपा, सपा और भाजपा में वो जाने के मूड में नहीं हैं। ऐसे में ब्राह्मण कार्ड खेल कर कांग्रेस में अपनी पहचान बना सकते हैं।

क्या होगा मिलिंद देवड़ा का?
मिलिंद देवड़ा, राहुल के बेहद करीबी नेताओं में से एक थे। वो राहुल गांधी के साथ विदेश दौरों पर भी गए थे। मुंबई में पार्टी प्रमुख के पद से इस्तीफा देने के बाद से देवड़ा इन दिनों कहीं नहीं है। अटकलों के विपरीत, देवड़ा ने बीजेपी के टिकट पर चुनाव नहीं लड़ा और अपनी पार्टी के लिए डटे रहे। आगे वो क्या करेंगे इसको लेकर तस्वीरें साफ नहीं है। एनसीपी और शिवसेना विकल्प हैं, लेकिन एनसीपी में पहले से ही पारिवारिक मतभेद चल रहे हैं। देवड़ा के सभी दलों के साथ अच्छे संबंध हैं। अगर वह 2024 में चुनाव लडऩे के इच्छुक हैं, तो उनके पास कई विकल्प हो सकते है।

कार्ति चिदंबरम की मुश्किलें
कार्ति चिदंबरम ने लोकसभा में डेब्यू कर लिया है लेकिन क्या वो अपने पिता के दम पर शिवगंगा से अगला चुनाव जीतेंगे या नहीं इस बात की गांरटी नहीं है। कांग्रेस से जीतना कठिन हो सकता है लेकिन विकल्प भी उनके सामने नहीं है। कांग्रेस के पास दक्षिण में कोई पहचान नहीं बची है। भाजपा ने अधिकांश क्षेत्रीय दलों को ये संदेश दे दिया है कि अगर आप हमारे साथ नहीं हैं, तो यह ठीक है, लेकिन आप कांग्रेस के साथ भी नहीं जा सकते हैं।