September 26, 2020

चीन को जवाब, भारत ने तैनात किया युद्धपोत

  • विरोध के बावजूद दक्षिण चीन सागर में तैयारी

नई दिल्ली, 31 अगस्त (एजेंसी)। 15 जून को पूर्वी लद्दाख के गलवान वैली में चीनी सैनिकों के साथ हुई हिंसक झड़प के बाद भारतीय नौसेना ने बड़ा कदम उठाते हुए दक्षिण चीन सागर में युद्धपोत तैनात किया है। हालांकि चीन ने दोनों देशों के बीच हुई बातचीत में इस कदम पर आपत्ति जताई थी।
चीन लगातार इस क्षेत्र में भारतीय नौसेना के जहाजों की उपस्थिति पर आपत्ति जताता रहा है। इस इलाके में चीन ने 2009 से मिलिटरी और आर्टिफिशल आइलैंड्स का इस्तेमाल करके काफी विस्तार किया है। सरकार से जुड़े सूत्रों ने बताया कि गालवान वैली में हिंसक झड़प में 20 भारतीय जवान शहीद हो गए थे जिसके बाद भारत ने दक्षिण चीन सागर में एक युद्धपोत तैनात किया है। इस युद्धपोत को उस इलाके में तैनात किया गया है जहां पीपुल्स लिबरेशन आर्मी की नौसेना ने किसी भी अन्य फोर्स की मौजूदगी पर ऐतराज जताया था। चीनी नेवी का दावा था कि दक्षिणी चीनी सागर का अधिकांश हिस्सा उसके क्षेत्र में आता है।

चीन ने की थी शिकायत
सूत्रों ने कहा कि दक्षिण चीन सागर में भारतीय नौसेना के युद्धपोत की तत्काल तैनाती से चीनी नौसेना में बेचैनी का माहौल है क्योंकि उन्होंने भारतीय पक्ष के साथ डिप्लोमैटिक लेवल की बातचीत में भारतीय युद्धपोत की उपस्थिति के बारे में शिकायत की थी।

बेहद गोपनीय रहा नौसेना का मिशन
सूत्रों ने बताया कि दक्षिण चीन सागर में अमेरिकी नौसेना ने भी अपने विध्वंसक और फ्रिगेट तैनात किए थे। यहां अपने युद्धपोत की तैनाती के दौरान भारतीय युद्धपोत लगातार अपने अमेरिकी समकक्षों के साथ संपर्क बनाए हुए थे। उन्होंने कहा कि रूटीन ड्रिल के हिस्से के रूप में, भारतीय युद्धपोत को लगातार अन्य देशों के सैन्य जहाजों की आवाजाही की स्थिति के बारे में अपडेट किया जा रहा था। उन्होंने कहा कि किसी भी सार्वजनिक चकाचौंध से बचने के लिए पूरे मिशन को बहुत ही गोपनीय तरीके से किया गया। इसी दौरान भारतीय नौसेना ने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के पास मलक्का स्ट्रेट्स में चीनी नौसेना की गतिविधि पर नजर रखने के लिए अपने फ्रंटलाइन जहाजों को तैनात किया। चीनी नौसेना इसी रास्ते से हिंद महासागर में प्रवेश करती है। इसके अलावा कई चीनी जहाज भी तेल या मर्चेंट शिपमेंट्स के साथ अन्य महाद्वीपों से आकर इसी रास्ते से गुजरते हैं।