September 22, 2020

चुनाव आयोग ने जारी किए सभी दलों को नए निर्देश

प्रत्याशियों का आपराधिक इतिहास बताओ

नई दिल्ली, 12 सितम्बर (एजेंसी)। चुनाव आयोग ने को आपराधिक छवि वाले प्रत्याशियों के मामलों को सार्वजनिक करने को लेकर संशोधित दिशा निर्देश जारी किया हैं। नए दिशा निर्देश में प्रत्याशियों के साथ ही उन्हें चुनाव लड़ाने वाली पार्टियों को भी नए नियम का पालन करने के लिए कहा गया है। संशोधित निर्देश में कहा गया है कि उम्मीदवार और उनकी पार्टी को आपराधिक केसों का विवरण न्यूज पेपर और टीवी में प्रकाशित कराना होगा। आयोग के संशोधित दिशा निर्देश के अनुसारआपराधिक छवि वाले उम्मीदवारों को नामांकन वापसी के 4 दिन के अंदर पहली पब्लिसिटी करनी होगी जबकि नामांकन वापसी के 5 से 8 दिनों के अंदर दूसरी पब्लिसिटी करनी होगी और नामांकन वापसी के 9 से चुनाव प्रचार के अंतिम दिन तक तीसरी पब्लिसिटी करानी होगी। आपराधिक छवि के उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों को चुनाव आयोग के इस दिशानिर्देश का पालन करना होगा।

देश में आपराधिक छवि वाले 233 सांसद
चुनावों और उससे संबंधित आंकड़े एकत्र करने वाली संस्था एडीआर ने 17वीं लोकसभा (2019) में चुनकर आए 542 में से 539 सांसदों के हलफनामों के विश्लेषण के आधार पर बताया है कि इनमें से 233 पर आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं जो कुल सांसदों का करीब 43 फीसदी होता है। इनमें से 159 सांसदों (29 फीसदी) के खिलाफ हत्या,हत्या के प्रयास,बलात्कार और अपहरण जैसे गंभीर आपराधिक मामले दर्ज और लंबित हैं। बीजेपी के 116 सांसदों (39 फीसदी) और कांग्रेस के 29 सांसदों (57 फीसदी) पर क्रिमिनल केस दर्ज हैं। रिपोर्ट के मुताबिक 2009 के लोकसभा चुनाव में आपराधिक मुकदमे वाले 162 सांसद चुनकर आए थे जबकि 2014 में ऐसे सांसदों की संख्या 185 थी। मौजूदा समय में आपराधिक छवि वाले 233 सांसद हैं जो लोकतंत्र के सबसे बड़े मंदिर में बैठते हैं। इनके अलावा बसपा के 10 में से 5, जेडीयू के 16 में से 13 ,तृणमूल कांग्रेस के 22 में से 9 और माकपा के 3 में से 2 सांसदों के खिलाफ आपराधिक मामले चल रहे हैं।