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जयपुर ग्रामीण सीट के लिए मशक्कत

लोकसभा चुनाव को लेकर भाजपा-कांग्रेस की तैयारियां शुरू

सांध्य ज्योति संवाददाता

जयपुर, 20 फरवरी। लोकसभा चुनाव का काउंटडाउन शुरू हो चुका है। जल्द ही चुनाव की तारीखों का ऐलान भी हो जाएगा। प्रदेश की 25 सीटों पर जीत के लिए कांग्रेस और बीजेपी दोनों ने ही तैयारियां भी शुरू कर दी हैं। लिहाजा, जयपुर ग्रामीण लोकसभा सीट पर भी दोनों ही प्रमुख पार्टियों के नेता टिकट के लिए दांव-पेच लगाने लगे हैं। यह सीट क्षेत्रफल के हिसाब से काफी बड़ी और महत्वपूर्व मानी जाती है। अलवर जिले से सटा जयपुर जिले का कोटपूतली कस्बा भी इस क्षेत्र में शामिल है वहीं, उससे करीब 125 किलोमीटर दूर फुलेरा भी। कुल 8 विधानसभा सीटें जयपुर ग्रामीण में आती हैं। इनमें से 7 जयपुर जिले की हैं तो एक अलवर जिले की बानसूर भी शामिल है।

अभी भाजपा का कब्जा
जयपुर ग्रामीण लोकसभा सीट पर वर्तमान में बीजेपी का कब्जा हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के प्रत्याशी कर्नल (रिटायर्ड) राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने इस सीट पर करीब 3 लाख से ज्यादा वोटों से जीत दर्ज की थी। उन्होंने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सीपी जोशी को शिकस्त दी थी लेकिन, 2018 में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस जयपुर ग्रामीण के अन्तर्गत आने वाली विधानसभा सीटों पर बेहतर प्रदर्शन करने में साबित हुई और कुल 8 में से 5 सीट कांग्रेस ने जीत ली जबकि, बीजेपी सिर्फ दो सीटों पर सिमट गई। वहीं एक सीट निर्दलीय के खाते में चली गई। 2009 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के लालचंद कटारिया ने इस सीट पर जीत दर्ज की थी। ये सीट 2009 में हुए परिसीमन के बाद नई बनी थी। इस सीट पर 2014 के आंकडों के हिसाब से कुल 16 लाख 99 हजार 462 मतदाता हैं।

विधानसभा चुनाव 2018 का परिणाम
1.बानसूर-शकुंतला रावत (कांग्रेस) 2. कोटपूतली- राजेन्द्र यादव(कांग्रेस) 3. जमवारामगढ़- गोपाल मीणा(कांग्रेस) 4. झोटवाड़ा-लालचंद कटारिया (कांग्रेस) 5. विराटनगर- इन्द्राज गुर्जर(कांग्रेस)। 6. आमेर – सतीश पूनिया(बीजेपी)। 7. फुलेरा- निर्मल कुमावत(बीजेपी)। 8. शाहपुरा- आलोक बेनीवाल(निर्दलीय)।

जातिगत समीकरण
इस सीट पर यदि जातिगत समीकरणों की बात की जाए तो जाट, ब्राह्मण और अनुसूचित जाति के मतदाताओं की संख्या ज्यादा हैं वहीं, गुर्जर, यादव, मीणा, राजपूत, माली और वैश्य मतदाताओं का भी चुनाव जिताने में काफी अहम रोल रहता है। इस क्षेत्र के हर इलाके की अपनी अलग- अलग समस्याएं हैं। कही पानी 10-10 दिन तक जनता को नहीं मिलता, तो कई गांवों में सड़कों की समस्या है। जहां सड़कें बन चुकी हैं वहां नालियां तक नहीं बनी हैं। कई इलाकों में सफाई भी बड़ी परेशानी हैं। हालांकि, बड़ी समस्या जयपुर-दिल्ली रोड भी है जो आज भी अधूरे काम की वजह से परेशानी का सबब बनी हुई है।