December 1, 2020

जीत में छिपे कांग्रेस के सियासी मायने

गहलोत के दांव ने निगम चुनाव में तोड़ दिया भाजपा का तिलिस्म

विशेष संवाददाता
जयपुर, 5 नवम्बर। राजस्थान के तीन बड़े शहरों जयपुर, कोटा और जोधपुर के छह नगर निगम चुनाव में बीजेपी पर कांग्रेस भारी पड़ी है। निगम चुनावों में जयपुर, जोधपुर और कोटा में 560 वार्र्डों में कांग्रेस ने 261 और बीजेपी ने 242 पर जीत दर्ज की जबकि 57 वार्र्डों में निर्दलीय ने जीतकर सबको चौंका दिया है। इस तरह से 6 नगर निगमों में से 3 में कांग्रेस अपना मेयर बनाने की स्थिति में है जबकि दो पर बीजेपी ने कब्जा बरकरार रखकर अपनी लाज बचा ली है और एक निगम की सत्ता का फैसला निर्दलीय के हाथ में है। एक साल पहले मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के द्वारा खेला गया दो निगम-दो मेयर का दांव कांग्रेस के लिए मास्टर स्ट्रोक साबित हुआ। राजस्थान के शहरी विकास मंत्री शांति धारीवाल फॉर्मूले के जरिए कांग्रेस नगर निगम में जीत का परचम फहरा सकी है। कांग्रेस सरकार आते ही पिछले साल 14 अक्टूबर को तीनों शहरों में 3 की जगह 6 नगर निगम बनाए गए. तीनों शहरों में वार्ड भी 221 से बढ़ाकर 560 कर दिए। इसके शिल्पकार रहे यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल। उनके इस फैसले का खूब विरोध भी हुआ, लेकिन यही फैसला कांग्रेस के लिए गेमचेंजर साबित हुआ। सूबे के इन नगर निगमों में बीजेपी का लंबे समय से कब्जा रहा है, जिसे इस बार सीएम गहलोत अपनी राजनीतिक समीकरण और परिसीमन के जरिए कांग्रेस को जीत दिलाने में कामयाब रहे। सीएम अशोक गहलोत और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के लिए नगर निगम चुनाव में जीत के सियासी मायने हैं। गहलोत इस जीत के बाद और मजबूत हुए। उन्होंने पार्टी में ऊपर तक ये मैसेज दिया है कि पायलट को हटाने के बाद जिस तरह की हार की आशंका जताई जा रही थी वैसा कुछ नहीं हुआ बल्कि उल्टे कांग्रेस ने जीत के नए रिकॉर्ड बना दिए। कांग्रेस ने यह चुनाव बिना किसी संगठन के लड़ा था, क्योंकि गोविंद सिंह डोटासरा अभी तक अपनी टीम नहीं बना सके हैं। डोटासरा के लिए भी यह बड़ी राहत है, क्योंकि बीते चार महीनों से संगठन में विस्तार न कर पाने के कारण पार्टी में उनकी पकड़ को लेकर सवाल खड़े हो रहे थे।

गहलोत सरकार के मंत्रियों और विधायकों का रिपोर्ट कार्ड
प्रदेश के जयपुर, जोधपुर और कोटा के 6 नगर निगमों के हुये चुनाव में सीएम अशोक गहलोतसमेत कई मंत्रियों और दिग्गज नेताओं की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हई थी। इनमें कुछ नेता भले ही अपने खुद के वार्ड में पार्टी के प्रत्याशी ना जीता पाये हों, लेकिन उनका अपने विधानसभा क्षेत्रों में प्रदर्शन ठीक ठाक रहा। राजधानी जयपुर में परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास परफॉर्मेंस के आधार पर टॉप पर रहे। प्रताप सिंह खाचरियावास जयपुर के सिविल लाइन विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। उनके विधानसभा में क्षेत्र में 24 में से 13 वार्डों में कांग्रेस ने जीत दर्ज करायी है। वहीं दूसरे नंबर पर आदर्श नगर विधायक रफीक खान रहे। आदर्श नगर में स्थित 25 वार्डों में से कांग्रेस के 13 पार्षद जीते हैं। तीसरे नंबर पर विधायक अमीन कागजी रहे। अमीन कागजी जयपुर शहर की किशनपोल सीट से विधायक हैं। इनके विधानसभा क्षेत्र में स्थित 21 वार्डों में से 9 पर पार्टी के पार्षद जीते हैं। सरकार के मुख्य सचेतक महेश जोशी के विधानसभा क्षेत्र हवामहल में 26 में से 9 पार्षद कांग्रेस के जीते हैं।

सीएम और धारीवाल के क्षेत्र में कांग्रेस का मिला बहुमत
जोधपुर सीएम अशोक गहलोत का गृह क्षेत्र है। वहां गहलोत का विधानसभा क्षेत्र और वार्ड जोधपुर उत्तर नगर निगम क्षेत्र में आता है। इस निगम क्षेत्र में कांग्रेस पार्टी को स्पष्ट बहुमत मिला है। यहां कांग्रेस ने 80 वार्डों में से 53 पर कब्जा जमाया है. वहीं कोटा में राज्य सरकार के दिग्गज मंत्री शांति धारीवाल की प्रतिष्ठा दांव पर थी। वहां शांति धारीवाल के विधानसभा क्षेत्र कोटा उत्तर नगर निगम में पार्टी को शानदार जीत मिली है। कोटा उत्तर में पार्टी ने कुल 70 वार्डों में से कांग्रेस ने 47 सीटों पर जीत दर्ज की है। कोटा दक्षिण में कांग्रेस ने बीजेपी को बराबर की टक्कर दी है। यहां कुल 80 वार्डों में से कांग्रेस और बीजेपी को बराबर-बराबर 36-36 सीटें मिली हैं।