September 24, 2020

जेके लोन अस्पताल के चिकित्सकों ने पोंपे डिजीज और स्पाइनल मस्क्यूलर अट्रोफी बीमारी से ग्रस्त बच्चे का किया इलाज

रेयर बीमारियों के इलाज में रचा इतिहास

जे के लोन अस्पताल, जयपुर के चिकित्सकों की टीम रेयर डिजीज का इलाज कर आए दिन चिकित्सा क्षेत्र में नए आयाम तैयार कर रही है। हाल ही में जेके लोन अस्पताल के रेयर डिजीज इंचार्ज एवं सीनियर प्रोफेसर डॉ. अशोक गुप्ता की टीम ने मात्र 44 दिन के बच्चे का इलाज कर इतिहास रच दिया।
चिकित्सक टीम के एसोसिएट प्रोफेसर एवं रेयर डिजीज एंड मेटाबोलिक जेनेटिक डिसऑर्डरस कंसल्टेंट डॉ. प्रियांशु माथुर और डॉ. रमेश चौधरी ने बताया कि यूपी निवासी एक बच्चा पोंपे डिजीज व स्पाइनल मस्क्युलर अट्रोफी-1 बीमारी से ग्रस्त था। इसका इलाज कर नया जीवन दान दिया गया।
उन्होंने बताया कि बच्चे का उपचार एंजाइम रिप्लेसमेंट थेरेपी अल्गलूकोसिडेस एल्फा (मायोजाइम) से शुरू किया गया। इस उम्र पर यह दवा शुरु करने का भी यह देश में संभवतया पहला ही बच्चा है। इस बच्चे को इस इलाज के लिए उत्तर प्रदेश के आगरा से जेके लोन अस्पताल जयपुर लाया गया। इस बच्चे के माता-पिता ने इस बच्चे को 20 दिन की उम्र पर तेज सांस चलने की वजह से दिखाया और आगरा में भर्ती कराया। वहा पर इलाज के बाद भी बच्चे को आराम नहीं आने और सास की समस्या के बढऩे की वजह से इस बच्चे को जयपुर के जेके लोन अस्पताल भेज दिया गया। बच्चे को सांस की समस्या के साथ साथ शरीर में ढीलापन एवं हरकत कम होने की भी परेशानी थी। जेके लोन के डॉक्टर्स ने जब बच्चे की जांच की तो पाया की बच्चे को सास की समस्या के साथ साथ दिल की परेशानी और मांसपेशियों में कमजोरी भी थी। इस पर जेके लोन के डॉक्टर्स ने इस पेशेंट का डीबीएस सैंपल दिल्ली भेज के जांच कराई। इसमें पोंपे नामक रेयर बीमारी की पुष्टि हुई। साथ ही डॉक्टर ने संदेह होने पर स्पाइनल मस्क्युलर अट्रोफी 1 की भी जांच एमएलपीए टेक्नीक से कराई और रोग की पुष्टि की।

पोंपे डिजीज की दवा पर खर्च सालाना 30 लाख का: पोंपे डिजीज की दवा की कीमत प्रति वर्ष लगभग 25-30 लाख है। इसे आजीवन देने की आवश्यकता है। यह दवा इस रोगी को अनुकंपा उपयोग कार्यक्रम के माध्यम से उपलब्ध कराई गई है। साथ साथ स्पाइनल मस्क्युलर अट्रोफी 1 की दवा रिसडिप्लाम के अनुकंपा उपयोग के लिए भी अप्लाई किया जो की जल्द ही प्राप्त होने की उम्मीद है। अल्गुलकोसिडेज़ अल्फ़ा (मायोज़ाइम) पोंपे रोगियों के लिए एक द्वैमासिक इंट्रावेनस एंजाइम रिप्लेसमेंट थेरेपी है और इसे सभी प्रकार के पोम्पे रोगियों को दिया जा सकता है। इसे यूएस एफडीए द्वारा 2014 में इन्फेंटाइल-ऑनसेट पोम्पे डिजीज के इलाज के लिए मंजूरी दे दी गई थी और यह दवा को सनोफी जेंजाइम नामक कंपनी द्वारा डेवलप किया गया था। रिस्डिप्लाम (एवरेसडी) लगभग 4 करोड़ रुपए सालाना की दवा है। यह 2 महीने की उम्र से बड़े बच्चो के लिए मुंह से लेने वाली एक दैनिक दवा है और सभी प्रकार के स्पाइनल मस्क्युलर एट्रोफी के बच्चो को दी जा सकती है। यह एक स्मॉल मोलेक्यूल ओरल ड्रग है जिसे बच्चे को घर पर ही दिया जा सकता है। 7 अगस्त, 2020 को अमेरिकी फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) द्वारा रिस्डिप्लाम को मंजूरी दी गई है, जो चार वर्षों के भीतर उपलब्ध स्पाइनल मस्क्युलर एट्रोफी के लिए तीसरी दवा बनी है। इस दवा को रोच कम्पनी द्वारा बनाया गया है।

40 हजार में से 1 बच्चे को हो सकता है पोंपे डिजीज: पोम्पे रोग के मरीजों में अल्फा-ग्लूकोसिडेस नामक एक एंजाइम की कमी होती है। यह रोग लगभग हर 40,000 में से किसी एक बच्चे को होता है और जेनेटिक डिफेक्ट की वजह से होने वाला एक मेटाबॉलिक रोग है। प्रभावित बच्चे के पैरेंटस इस बीमारी के डिफेक्टिव जीन को कैरी करते है और खुद इस बीमारियों से पीडि़त नहीं होते है क्युकी हर इंसान में इस जीन की दो कॉपीज होती है। अगर किसी भी इंसान के शरीर में इस जीन की एक कॉपी भी नॉर्मल है तो उनको यह बीमारी नहीं होती है। अगर बच्चे में इस जीन की दोनों डिफेक्टिव कॉपीज आ जाती है तो बच्चे इस बीमारी से पीडि़त हो जाते है। यह बीमारी लड़के या लड़कियो दोनों को प्रभावित कर सकता है।