Tue. Jun 18th, 2019

जैण्डर समानता के प्रति जागरूकता लाने की जरूरत: डॉ. प्रसाद

सांध्य ज्योति संवाददाता
जयपुर, 13 जून। जनगणना वर्ष 2021 में बालिका लिंगानुपात बढ़ाने में स्वैच्छिक संगठन महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते है। साथ ही पीसीपीएनडीटी एक्ट का प्रभावी क्रियान्वयन करवाने व जैण्डर समानता के प्रति जागरूकता लाने के लिए भी काम करने की जरूरत है। बुधवार को होटल ओम टॉवर में आयोजित राज्य स्तरीय स्वैच्छिक संगठनों की कार्यशाला को संबोधित करते हुए बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ के राज्य नोडल अधिकारी डॉ.जगदीश प्रसाद ने उक्त विचार व्यक्त किए। कार्यशाला का आयोजन महिला अधिकारिता विभाग के बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान, प्लान इण्डिया व एसआरकेपीएस के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित किया गया। डॉ.प्रसाद ने कहा कि स्वैच्छिक संगठन अपने-अपने जिलों में बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ की जिला स्तरीय टॉस्क फोर्स के सदस्य या सहयोगी बनकर कार्य कर सकते है। उन्होनें कहा कि पीसीपीएनडीटी की जिला स्तरीय सलाहकार समिति के सदस्य बनकर भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते है। डॉ. जगदीश ने बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत राज्य व जिला स्तर पर किए गए नवाचारों पर विस्तार से चर्चा की। राज्य महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष प्रो. लाड कुमारी जैन ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य में महिला व बालिका नीति बनाई गई है उनके मुताबिक कार्य किया जाऐं तो बेहतर परिणाम आ सकते है। उन्होंने कहा कि बेटियों की घटती हुई संख्या को बढ़ाने के साथ-साथ नाबालिग बच्चियों के साथ हो रही घटनाएं बहुत बड़ी चिंता का विषय है। इस मौके पर सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. मीतासिंह, महिला अधिकारिता विभाग की अतिरिक्त निदेशक सुनिता मीणा, प्लान इण्डिया प्रतिनिधि मिनाक्षी शर्मा, एसआरकेपीएस प्रतिनिधि मधु सिंह, सामाजिक कार्यकर्ता सत्यदेव बारहठ, गोपाल वर्मा, बृजमोहन शर्मा, निरंजन सिंह, महेश पनपालिया, पतराम चौधरी, जीवराज कस्वां, छैल बिहारी व भूपेश दिक्षित सहित 62 स्वैच्छिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।