September 21, 2020

डीआरएस नहीं इस्तेमाल करने पर सचिन और धोनी से नाराज थे शशि थरूर

नई दिल्ली, (एजेंसी)। भारतीय राजनेता शशि थरूर ने डिसिजन रीव्यू सिस्टम (डीआरएस) को क्रिकेट के लिए बेहद अहम हिस्सा बताया है। उन्होंने इसके खेल पर असर पर चर्चा करते हुए कहा कि डीआरएस (डीआरएस) क्रिकेट के लिए सबसे प्रयोगों में से एक है। कांग्रेस नेता और सांसद ने कहा कि वह सचिन तेंडुलकर और महेंद्र सिंह धोनी से तब बहुत निराश हुए थे, जब इन दोनों ने डीआरएस लागू करने के प्रति रूचि नहीं दिखाई थी।
थरूर ने स्पोर्टस कीड़ा के फेसबुक पेज पर कहा कि वह शुरू से ही डीआरएस के फैन हैं और भारत को इसे इस्तेमाल करने पर शुरू में ही राजी हो जाना चाहिए था। थरूर ने कहा, मैं तकनीक का बहुत बड़ा फैन हूं। मैं शुरू से ही डीआरएस की वकालत करता हूं और जब धोनी तथा तेंडुलकर ने इसे मानने से इनकार किया तो मैं काफी नाराज था। मैं क्रिकेट देखता हूं हर बार मैंने देखा है कि खराब अंपायरिंग फैसलों का हमें कितना नुकसान हुआ है। मुझे समझ नहीं आया था कि हम डीआरएस से इतना परहेज क्यों कर रहे थे।

एक अलग नाम बनाया : थरूर ने कहा, मैं अब डीआरएस के बिना कभी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट नहीं देखूंगा। उन्होंने कहा कि धोनी ने डीआरएस का सही इस्तेमाल कर अपने लिए एक अलग नाम बनाया। थरूर का इशारा सोशल मीडिया और लोगों के बीच प्रचलित नाम को लेकर था। थरूर ने जोर देकर कहा कि तकनीक कितनी गलतियों को रोकती है इसलिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट भविष्य में कभी डीआरएस के बिना नहीं खेला जाएगा। उन्होंने कहा, डीआरएस कितनी गलतियों को रोकता है और यह टीवी पर देखने वाले के लिए एक अलग स्तर का रोमांच पैदा करता है। और जहां तक मुझे लगता है कि यह एक अलग मसाले की तरह काम करता है। भारत डीआरएस को इस्तेमाल करने वाले शुरुआती देशों में था। श्रीलंका के खिलाफ 2008 में इसका इस्तेमाल किया गया था, लेकिन भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी इसके हक में नजर नहीं आए। वह इस तकनीक में कई खामियां मानते थे। पिछले दशक में जाकर ही भारतीय टीम ने इसे पूरी तरह अपनाना शुरू किया।